रुद्रचंद का वीर सेनापति पुरुषोत्तम पंत
परिचय
पुरुषोत्तम पंत, जिन्हें पुरखु पंत के नाम से भी जाना जाता है, चंद राजा रुद्रचंद के प्रमुख सेनापति थे। वे मूलतः पिथौरागढ़ के गंगोलीहाट क्षेत्र के निवासी तथा मराठी ब्राह्मण जयदेव के पुत्र बताए जाते हैं। कुमाऊँ के मध्यकालीन इतिहास में उनका विशेष स्थान है। उन्हें मुख्यतः सीरा विजय में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के लिए जाना जाता है। रुद्रचंद के शासनकाल में चंद राज्य के विस्तार में पुरुषोत्तम पंत की सैन्य प्रतिभा का महत्वपूर्ण योगदान रहा। बाद में ग्वालदम/बधाणगढ़ के युद्ध में उन्होंने वीरगति प्राप्त की।
पुरुषोत्तम पंत से संबंधित प्रमुख तथ्य
1. परिचय एवं उपाधि
- पुरुषोत्तम पंत रुद्रचंद के सेनापति थे।
- रुद्रचंद को चंद वंश का 45वाँ राजा बताया जाता है।
- उनका उपनाम ‘पुरखु पंत’ था।
- वे मूल रूप से गंगोलीहाट (पिथौरागढ़) के निवासी थे।
- वे मराठी ब्राह्मण जयदेव के पुत्र थे।
- उन्हें कुमाऊँ इतिहास का ‘रॉबर्ट ब्रूस’ कहा जाता है।
2. सीरा अभियान एवं विजय
- पुरुषोत्तम पंत को मुख्यतः सीरा अभियान के लिए जाना जाता है।
- रुद्रचंद के पिता बालो कल्याणचंद सीरा पर अधिकार करना चाहते थे, लेकिन अपने जीवनकाल में वे इस उद्देश्य को पूरा नहीं कर सके।
- रुद्रचंद ने अपने पिता की इच्छा को पूरा करने का संकल्प लिया।
- सीरा विजय के लिए किए गए कई प्रयास असफल रहे।अंततः रुद्रचंद के सेनापति पुरुषोत्तम पंत ने सीरागढ़ के किले में प्रवेश कर चंद राज्य का झंडा फहरा दिया।इस प्रकार जिस कार्य को कल्याणचंद अपने जीवनकाल में पूरा नहीं कर सके, उसे उनके पुत्र रुद्रचंद ने पूरा किया।
- सीरागढ़ से हरिमल्ल को हटाने में पुरुषोत्तम पंत की महत्वपूर्ण भूमिका थी।
3. सीरा विजय का महत्व
- सीरा की विजय के बाद चंद राज्य का विस्तार अस्कोट, दारमा एवं जोहार तक हो गया।
- इस विजय ने कुमाऊँ में चंदों की राजनीतिक एवं सैन्य शक्ति को और मजबूत किया।
- सीरा विजय को रुद्रचंद के शासनकाल की महत्वपूर्ण सैन्य उपलब्धियों में माना जाता है।
4. कल्याणचंद की पत्नी का संकल्प
- परंपरा के अनुसार, कल्याणचंद की पत्नी ने वचन लिया था कि जब तक सीरागढ़ का किला चंदों के अधिकार में नहीं आ जाता, तब तक वह सती नहीं होगी।
- सीरागढ़ पर चंदों का अधिकार स्थापित होने के बाद उन्होंने अपने वचन के अनुसार सती होने का निर्णय लिया।
5. ग्वालदम/बधाणगढ़ का युद्ध एवं पुरुषोत्तम पंत की वीरगति
- ग्वालदम/बधाणगढ़ का युद्ध गढ़वाल के पंवार शासक बलभद्र शाह और कुमाऊँ के चंद शासक रुद्रचंद के बीच हुआ।
- इस युद्ध में पंवार शासक बलभद्र शाह को कत्यूरी शासक सुकालदेव/सुखदेव/सुखलदेव का समर्थन प्राप्त था।
- इस युद्ध में चंद सेना के सेनापति पुरुषोत्तम पंत वीरगति को प्राप्त हुए।
- वाल्टन के अनुसार, ग्वालदम/बधाणगढ़ का युद्ध 1581 ई. में हुआ।
- शिव प्रसाद डबराल के अनुसार, यह युद्ध 1590–91 ई. में हुआ।
- पुरुषोत्तम पंत की मृत्यु के बाद रुद्रचंद ने बैजनाथ के युद्ध में कत्यूरी शासक सुकालदेव/सुखदेव/सुखलदेव को पराजित कर उसकी हत्या कर दी।
निष्कर्ष
पुरुषोत्तम पंत चंदकालीन कुमाऊँ के प्रमुख सैन्य नायकों में से एक थे। रुद्रचंद के शासनकाल में उन्होंने चंद राज्य के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विशेष रूप से सीरागढ़ विजय में उनके सैन्य कौशल ने रुद्रचंद को अपने पिता कल्याणचंद की अधूरी इच्छा पूरी करने में सहायता दी। सीरा विजय के बाद चंद राज्य का विस्तार अस्कोट, दारमा और जोहार तक हुआ। बाद में ग्वालदम/बधाणगढ़ के युद्ध में उनकी वीरगति हुई। इस प्रकार पुरुषोत्तम पंत का नाम चंदों की सैन्य विजय, सीरा अभियान और कुमाऊँ के राजनीतिक विस्तार के इतिहास से अभिन्न रूप से जुड़ा हुआ है।