राजा भीष्मचंद|Chand Dynasty|Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material

परिचय

राजा भीष्मचंद चंद वंश के इतिहास में एक महत्वपूर्ण शासक थे। उनका नाम विशेष रूप से खगमराकोट के किले के जीर्णोद्धार तथा आलमनगर की स्थापना से जुड़ा है, जिसे आगे चलकर अल्मोड़ा के नाम से प्रसिद्धि मिली। वे ऐसे समय में शासन कर रहे थे जब कुमाऊँ में चंद सत्ता को विभिन्न स्थानीय शक्तियों से चुनौती मिल रही थी। उनकी मृत्यु के कारण आलमनगर को तत्काल राजधानी बनाने की उनकी योजना पूरी नहीं हो सकी। उत्तराधिकारी के रूप में उन्होंने बालो कल्याण चंद को गोद लिया, जिससे चंद वंश की राजसत्ता आगे बढ़ी।

प्रमुख बिंदु

  • भीष्मचंद ने खगमराकोट के किले का जीर्णोद्धार करवाया और उसके निकट ‘आलमनगर’ नामक नगर की नींव रखी, जो आगे चलकर अल्मोड़ा के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
  • भीष्मचंद आलमनगर को अपनी राजधानी बनाना चाहते थे, लेकिन वे यहाँ राजधानी स्थापित नहीं कर सके।
  • इसी दौरान एक खस सरदार श्री गजुवाठिगा ने खगमराकोट के किले पर आक्रमण किया और इस संघर्ष में भीष्मचंद की हत्या कर दी।
  • भीष्मचंद की कोई संतान नहीं थी। इसलिए चंद वंश की राजपरंपरा को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने एक पुत्र को गोद लिया।
  • गोद लिए गए पुत्र का नाम बालो कल्याण चंद था, जो आगे चलकर भीष्मचंद का उत्तराधिकारी बना।
  • कलपानी गाड़-भेटा (पिथौरागढ़) से प्राप्त ताम्रपत्र में ‘महाराजाधिराज श्री कल्याणचंद्र देव’ का उल्लेख मिलता है।
  • यह कल्याणचंद्र भीष्मचंद का उत्तराधिकारी था और उसने भीष्मचंद द्वारा प्रदत्त ताम्रपत्र का जीर्णोद्धार करवाया।
  • इसी ताम्रपत्र के अनुसार, कल्याणचंद्र ने नरि पांडे को जमीन प्रदान की थी।
  • अल्मोड़ा से शासन करने वाला अंतिम शासक भीष्मचंद था।

निष्कर्ष

राजा भीष्मचंद चंद वंश के इतिहास में अल्मोड़ा के प्रारंभिक विकास से जुड़े महत्वपूर्ण शासक थे। उन्होंने खगमराकोट के किले का जीर्णोद्धार करवाकर उसके समीप आलमनगर की नींव रखी, जो आगे चलकर अल्मोड़ा के रूप में विकसित हुआ। हालांकि, खस सरदार श्री गजुवाठिगा के आक्रमण में उनकी मृत्यु हो जाने के कारण वे आलमनगर को राजधानी नहीं बना सके। संतान न होने के कारण उन्होंने बालो कल्याण चंद को गोद लिया, जिसने चंद राजवंश की परंपरा को आगे बढ़ाया। कलपानी गाड़-भेटा से प्राप्त ताम्रपत्र कल्याणचंद्र के शासन तथा भूमि-दान की जानकारी देता है। अतः भीष्मचंद का महत्व केवल एक चंद शासक के रूप में नहीं, बल्कि आलमनगर की स्थापना और अल्मोड़ा के भावी राजनीतिक महत्व की आधारभूमि तैयार करने वाले शासक के रूप में भी है।

Similar Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *