बंगाल विभाजन एवं बनारस कांग्रेस अधिवेशन, 1905
परिचय
1905 का बंगाल विभाजन भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना थी, जिसने देशभर में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध असंतोष को व्यापक बनाया। इस घटना के विरोध में स्वदेशी आंदोलन को गति मिली और राष्ट्रीय चेतना का विस्तार हुआ। इसका प्रभाव कुमाऊँ क्षेत्र के राजनीतिक कार्यकर्ताओं पर भी पड़ा, जिन्होंने राष्ट्रीय आंदोलन की गतिविधियों में भाग लेकर क्षेत्र को देशव्यापी राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़ा।
प्रमुख तथ्य
- 1905 ई. में वायसराय लॉर्ड कर्जन के शासनकाल में बंगाल का विभाजन किया गया।
- बंगाल विभाजन के विरोध में स्वदेशी एवं बहिष्कार आंदोलन को व्यापक प्रोत्साहन मिला।
- 1911 ई. में बंगाल विभाजन को रद्द कर दिया गया।
- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का 21वाँ अधिवेशन दिसंबर 1905 में बनारस (वर्तमान वाराणसी) में आयोजित हुआ।
- इस अधिवेशन की अध्यक्षता गोपाल कृष्ण गोखले ने की थी।
- कुमाऊँ से पंडित गोविंद बल्लभ पंत, हरगोविंद पंत और बद्रीदत्त पांडे ने इस अधिवेशन में भाग लिया था
- गोपाल कृष्ण गोखले भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के प्रमुख उदारवादी नेताओं में से एक थे और गोविंद बल्लभ पंत के राजनीतिक जीवन पर उनका प्रभाव माना जाता है।
- 1905 के बनारस कांग्रेस अधिवेशन में बद्रीदत्त पांडे की लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक से पहली मुलाकात हुई थी।
निष्कर्ष
1905 का बंगाल विभाजन भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। इसके विरोध ने स्वदेशी और बहिष्कार की भावना को व्यापक बनाया। बनारस कांग्रेस अधिवेशन ने कुमाऊँ के राजनीतिक कार्यकर्ताओं और राष्ट्रीय नेताओं के बीच संपर्क को बढ़ावा दिया, जिससे क्षेत्र में राष्ट्रीय चेतना के विकास को प्रोत्साहन मिला।