डिबेटिंग क्लब एवं अल्मोड़ा अखबार
परिचय
डिबेटिंग क्लब की स्थापना 1870 ई. में अल्मोड़ा में की गई थी। यह शिक्षित एवं जागरूक लोगों के लिए विचार-विमर्श और चर्चा का प्रमुख केंद्र था। इसकी परिकल्पना बुद्धि बल्लभ पंत ने की थी तथा भीम सिंह इसके संरक्षक थे। इस क्लब ने उत्तराखण्ड में सामाजिक एवं राजनीतिक चेतना के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसी बौद्धिक वातावरण में 1871 ई. में अल्मोड़ा अखबार का प्रकाशन प्रारंभ हुआ, जिसने क्षेत्र की समस्याओं और जनहित के मुद्दों को सामने रखने में योगदान दिया।
प्रमुख तथ्य
- डिबेटिंग क्लब की स्थापना 1870 ई. में अल्मोड़ा में हुई थी।
- डिबेटिंग क्लब एक मिलन केंद्र एवं विचार-विमर्श का स्थल था।
- डिबेटिंग क्लब की स्थापना की परिकल्पना बुद्धि बल्लभ पंत ने की थी।
- भीम सिंह, जो चंद वंश से संबंधित थे, डिबेटिंग क्लब के संरक्षक थे।
- 1870 ई. में संयुक्त प्रांत के लेफ्टिनेंट गवर्नर सर विलियम म्यूर अल्मोड़ा आए थे।
- सर विलियम म्यूर के सुझाव पर 1871 ई. में अल्मोड़ा अखबार का प्रकाशन प्रारंभ हुआ। इसके संपादक बुद्धि बल्लभ पंत थे।
- अल्मोड़ा अखबार का प्रकाशन 1871 ई. में शुरू हुआ और इसे 1918 ई. में तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर लोमस द्वारा बंद करवा दिया गया।
- अल्मोड़ा अखबार की सरकारी पंजीकरण संख्या 10 बताई जाती है।
- अल्मोड़ा अखबार अंग्रेजी समाचार-पत्र पायनियर (The Pioneer) का समकालीन था।
- अल्मोड़ा अखबार के संपादक क्रमशः बुद्धि बल्लभ पंत, मुंशी इम्तियाज अली, जीवानंद जोशी, सदानंद सनवाल, विष्णुदत्त जोशी तथा बद्रीदत्त पांडे थे।
- 1913 ई. के बाद बद्रीदत्त पांडे ने अल्मोड़ा अखबार के संपादन का कार्य संभाला।
निष्कर्ष
डिबेटिंग क्लब और अल्मोड़ा अखबार उत्तराखण्ड में आधुनिक बौद्धिक चेतना एवं पत्रकारिता के विकास के महत्वपूर्ण पड़ाव थे। डिबेटिंग क्लब ने लोगों को विचार-विमर्श का मंच दिया, जबकि अल्मोड़ा अखबार ने सामाजिक समस्याओं और जनहित के मुद्दों को सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बनाया। बुद्धि बल्लभ पंत और बद्रीदत्त पांडे जैसी हस्तियों का योगदान उत्तराखण्ड की पत्रकारिता के इतिहास में उल्लेखनीय है।