बालेश्वर मंदिर |Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material
परिचय
बालेश्वर मंदिर चंपावत का एक अत्यंत महत्वपूर्ण ऐतिहासिक एवं स्थापत्य स्मारक है। यह मंदिर समूह कुमाऊँ की मध्यकालीन स्थापत्य परंपरा तथा चंद शासकों की धार्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण प्रमाण प्रस्तुत करता है। मंदिर से प्राप्त विभिन्न ताम्रपत्र एवं अभिलेखों के कारण इसका महत्व और बढ़ जाता है। इन अभिलेखों में कत्यूरी, चंद तथा नेपाल के शासकों से संबंधित महत्वपूर्ण ऐतिहासिक जानकारी मिलती है। मंदिर की स्थापना के संबंध में ऐतिहासिक एवं पौराणिक दोनों प्रकार की मान्यताएँ प्रचलित हैं।
प्रमुख तथ्य
- बद्रीनाथ पांडे के अनुसार बालेश्वर मंदिर का निर्माण उद्यान चंद ने करवाया था।
- बालेश्वर मंदिर समूह का निर्माण चंद राजाओं द्वारा करवाया गया माना जाता है।
- मानसखंड के अनुसार बालेश्वर मंदिर की स्थापना वानरराज बाली द्वारा की गई थी।
- चंद शासक विक्रम चंद ने भी बालेश्वर मंदिर की मरम्मत करवायी थी।
- मंदिर की अंतिम मरम्मत 1796 ई. में गोरखा सूबेदार महावीर थापा द्वारा करवायी गई।
- बालेश्वर मंदिर से कत्यूरी शासक देशटदेव का ताम्रलेख प्राप्त हुआ है।
- मंदिर से ज्ञानचंद तथा उद्यान चंद के लेख भी प्राप्त हुए हैं।
- बालेश्वर मंदिर से नेपाल के शासक क्राचलदेव का 1223 ई. का ताम्रलेख प्राप्त हुआ है।
- क्राचलदेव के 1223 ई. के ताम्रलेख में 10 मांडलिक राजाओं के नामों का उल्लेख मिलता है।
- इसके अतिरिक्त बालेश्वर मंदिर से रुद्रचंद तथा विक्रम चंद के लेख भी प्राप्त हुए हैं।
निष्कर्ष
बालेश्वर मंदिर चंपावत के इतिहास का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। इसके निर्माण, पुनर्निर्माण तथा मरम्मत से संबंधित परंपराएँ विभिन्न कालों की सांस्कृतिक निरंतरता को दर्शाती हैं। मंदिर से प्राप्त देशटदेव, ज्ञानचंद, उद्यान चंद, रुद्रचंद, विक्रम चंद और क्राचलदेव से संबंधित अभिलेख विशेष रूप से ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। इनमें 1223 ई. का क्राचलदेव ताम्रलेख और 10 मांडलिक राजाओं का उल्लेख परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण तथ्य है।