राजा इन्द्रचंद|Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material
परिचय
राजा इन्द्रचंद चंद वंश के प्रारंभिक शासकों में उल्लेखित एक महत्वपूर्ण शासक था। वह पूर्णचंद का उत्तराधिकारी था। उसके शासनकाल को विशेष रूप से रेशम उत्पादन एवं रेशमी वस्त्र निर्माण की परंपरा से जोड़ा जाता है। एटकिंसन के अनुसार इन्द्रचंद ने अपने राज्य में रेशम उत्पादन तथा उससे रेशमी वस्त्र बनाने का कार्य प्रारंभ कराया। इसके लिए मैदानी क्षेत्रों से पट्टवायों (रेशम बुनकरों) को कुमाऊँ लाया गया। रेशमी वस्त्रों के उत्पादन एवं व्यापार के माध्यम से चंद राज्य की आर्थिक समृद्धि बढ़ने की बात कही जाती है। उसके व्यक्तित्व के संबंध में उसे अभिमानी शासक भी बताया गया है।
प्रमुख बिंदु
- पूर्णचंद के बाद उसका पुत्र इन्द्रचंद चंद वंश की गद्दी पर बैठा।
- एटकिंसन के अनुसार इन्द्रचंद ने अपने राज्य में रेशम उत्पादन तथा रेशमी वस्त्र निर्माण का कार्य प्रारंभ कराया।
- रेशम उद्योग के लिए इन्द्रचंद द्वारा मैदानी क्षेत्रों से पट्टवायों (रेशम के बुनकरों) को कुमाऊँ लाए जाने का उल्लेख मिलता है।
- इन पट्टवायों ने श्रेणीबद्ध होकर रेशमी वस्त्रों का निर्माण किया तथा उनका विभिन्न क्षेत्रों में व्यापार किया।
- रेशमी वस्त्रों के व्यापार के लिए नेपाल के मार्ग से चीन के साथ व्यापारिक संबंध स्थापित किए जाने का उल्लेख मिलता है।
- रेशम के उत्पादन एवं व्यापार से चंद राज्य की आर्थिक समृद्धि और ‘श्री’ में वृद्धि होने की बात कही जाती है।
- परंपरा के अनुसार रेशमी वस्त्रों के रंग को पक्का करने के लिए झूठी खबरें फैलाने की प्रथा थी, जिसे ‘पटरंगवाली’ कहा जाता था।
- इन्द्रचंद के संबंध में परंपरागत विवरण में उसे अभिमानी शासक बताया गया है, जो स्वयं को इंद्र के समान समझता था।
- परंपरा के अनुसार रेशम के कीड़ों को कुमाऊँ में तिब्बत से लाया गया था।
- इन्द्रचंद द्वारा राज्यभर में रेशम के कारखाने स्थापित किए जाने का उल्लेख मिलता है।
- परंपरा के अनुसार चीन की राजकन्या से विवाह करने वाला चंद राजा इन्द्रचंद था।
- इन्द्रचंद के बाद संसार चंद चंद सिंहासन पर बैठा।
- संसार चंद के बाद क्रमशः सुधाचंद, हरिचंद और वीणाचंद चंद वंश के शासक बने।
- आधुनिक काल में कुमाऊँ में रेशम-कीट पालन से संबंधित संस्थागत गतिविधियों का भी विकास हुआ। प्रेमनगर, देहरादून में 1958 से रेशम-कीट पालन फार्म के अस्तित्व का उल्लेख मिलता है। इसे इन्द्रचंद के काल से अलग, आधुनिक रेशम-उद्योग के विकास के संदर्भ में देखना चाहिए।
निष्कर्ष
राजा इन्द्रचंद को चंद वंश के प्रारंभिक इतिहास में विशेष रूप से रेशम उत्पादन एवं रेशमी वस्त्र उद्योग के विकास से जोड़कर देखा जाता है। एटकिंसन के अनुसार उसके समय में रेशम उत्पादन और रेशमी वस्त्र निर्माण को प्रोत्साहन मिला तथा मैदानी क्षेत्रों से पट्टवायों को कुमाऊँ लाकर इस कार्य में लगाया गया। नेपाल के मार्ग से चीन के साथ व्यापारिक संबंध स्थापित करने की परंपरा भी उसके आर्थिक प्रयासों को महत्वपूर्ण बनाती है। रेशम के उत्पादन एवं व्यापार से चंद राज्य की आर्थिक स्थिति मजबूत होने की बात कही जाती है। उसके व्यक्तित्व से संबंधित परंपराओं में उसे अभिमानी शासक बताया गया है तथा चीन की राजकन्या से विवाह का उल्लेख भी मिलता है। इन्द्रचंद के बाद संसारचंद, सुधाचंद, हरिचंद और वीणाचंद क्रमशः चंद सिंहासन पर आसीन हुए।