बैजनाथ के परवर्ती कात्यूरी राजा धामदेव / दुलाशाही / धामदेव दुलाशाही / धामशाही |Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material
परिचय
धामदेव बैजनाथ की परवर्ती कात्यूरी शाखा का एक महत्वपूर्ण शासक माना जाता है। विभिन्न वंशावलियों और लोकगाथाओं में उसका उल्लेख अलग-अलग नामों से मिलता है। पाली-पछाऊँ की वंशावली के अनुसार वह जियारानी (मौला देवी) से उत्पन्न प्रीतमदेव का उत्तराधिकारी था। उसके शासनकाल की प्रमुख उपलब्धि डोटी विजय मानी जाती है, जिसके बाद डोटी को कात्यूरी राज्य में सम्मिलित किया गया। धामदेव से संबंधित मालूसाही-राजुला की प्रसिद्ध लोकगाथा कुमाऊँ की समृद्ध लोक-सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
प्रमुख बिंदु
- पाली-पछाऊँ वंशावली के अनुसार धामदेव, प्रीतमदेव और जियारानी (मौला देवी) का पुत्र तथा उसका उत्तराधिकारी था।
- धामदेव को विभिन्न स्रोतों में धामदेव, दुलाशाही, धामदेव दुलाशाही तथा धामशाही जैसे नामों से संबोधित किया गया है।
- धामदेव की प्रमुख राजनीतिक उपलब्धि डोटी पर विजय मानी जाती है। उसने डोटी को जीतकर उसे कात्यूरी राज्य में सम्मिलित किया था।
- धामदेव की डोटी विजय का वर्णन ‘नारसिंहजाप’ में मिलता है। यह उसके सैन्य अभियानों की जानकारी देने वाला महत्वपूर्ण स्रोत है।
- डोटी विजय से धामदेव के शासनकाल में कात्यूरी सत्ता के विस्तार और राजनीतिक प्रभाव का संकेत मिलता है।
- उसके शासनकाल में कात्यूरी राज्य को तुर्कों के आक्रमण का सामना भी करना पड़ा होगा। हालांकि इस संबंध में उपलब्ध जानकारी को सावधानीपूर्वक देखा जाना चाहिए।
- धामदेव के दो पुत्र—मालूसाही और लाडमसाही—बताए जाते हैं। इनमें मालूसाही का नाम कुमाऊँ की लोकगाथाओं में विशेष रूप से प्रसिद्ध है।
- जागर गाथाओं में वैराठ के राजा मालूसाही और दरमा की शौक्याणी राजुला की प्रसिद्ध प्रणय-कथा का वर्णन मिलता है।
- मालूसाही-राजुला की गाथा केवल प्रेम-कथा नहीं है, बल्कि यह कुमाऊँ की लोक-संस्कृति, सामाजिक जीवन और पर्वतीय जनपरंपराओं की महत्वपूर्ण अभिव्यक्ति भी है।
- धामदेव के समय छमुनापातर नामक प्रसिद्ध नृत्यांगना का उल्लेख मिलता है, जो उस समय के सांस्कृतिक जीवन की ओर संकेत करता है।
- धामदेव के शासनकाल से संबंधित जानकारी में ऐतिहासिक स्रोतों और लोकपरंपराओं दोनों की भूमिका है। इसलिए लोकगाथाओं से प्राप्त विवरणों का ऐतिहासिक तथ्यों के साथ आलोचनात्मक परीक्षण आवश्यक है।
निष्कर्ष
धामदेव बैजनाथ की परवर्ती कात्यूरी शाखा का एक महत्वपूर्ण शासक था, जिसने अपने शासनकाल में कात्यूरी सत्ता के राजनीतिक एवं सैन्य प्रभाव को बढ़ाने का प्रयास किया। पाली-पछाऊँ वंशावली उसे जियारानी से उत्पन्न प्रीतमदेव का उत्तराधिकारी बताती है, जबकि नारसिंहजाप उसकी डोटी विजय का उल्लेख करता है। डोटी को कात्यूरी राज्य में सम्मिलित करना उसकी प्रमुख राजनीतिक उपलब्धि मानी जाती है। उसके समय तुर्कों के आक्रमण की संभावना का भी उल्लेख मिलता है। धामदेव का महत्व केवल राजनीतिक इतिहास तक सीमित नहीं है; उसके पुत्र मालूसाही और राजुला की प्रसिद्ध प्रेमगाथा ने कुमाऊँ की लोक-संस्कृति में उसे स्थायी स्थान दिया है। साथ ही छमुनापातर जैसी नृत्यांगना का उल्लेख तत्कालीन सांस्कृतिक परिवेश को भी दर्शाता है। इस प्रकार धामदेव राजनीतिक विस्तार और कुमाऊँ की लोक-सांस्कृतिक परंपरा—दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण कात्यूरी शासक था।