पदमदेव|Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material
परिचय
देशटदेव के पश्चात उसका पुत्र पदमदेव कार्तिकेयपुर राज्य की राजगद्दी पर बैठा। वह तृतीय कत्यूरी परिवार के महत्वपूर्ण शासकों में माना जाता है। उसके शासनकाल की जानकारी मुख्यतः पाण्डुकेश्वर से प्राप्त ताम्र अभिलेख से मिलती है। पदमदेव ने लंबे समय तक शासन किया और धार्मिक संस्थाओं को पर्याप्त संरक्षण प्रदान किया। वह शक्तिशाली, शैव धर्मावलंबी तथा अत्यंत दानशील शासक था। विशेष रूप से बद्रीनाथ मंदिर को भूमि दान देने के कारण उसकी दानशीलता का उल्लेख मिलता है।
पदमदेव मुख्य तथ्य
- देशटदेव के पश्चात उसका पुत्र पदमदेव कार्तिकेयपुर राज्य का शासक बना।
- पदमदेव की माता का नाम पझल्ल देवी था।
- पदमदेव के शासनकाल से संबंधित एक ताम्र अभिलेख पाण्डुकेश्वर से प्राप्त हुआ है, जो उसके शासन की महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करता है।
- पदमदेव ने 25 वर्ष से अधिक समय तक शासन किया था, जिससे उसके दीर्घकालीन शासन का संकेत मिलता है।
- उसने अपने शासनकाल के 25वें वर्ष बद्रीनाथ मंदिर को भूमिदान प्रदान किया था।
- पदमदेव एक शक्तिशाली एवं दानी शासक था। उसकी दानशीलता उसके शासनकाल की प्रमुख विशेषताओं में मानी जाती है।
- पदमदेव शैव धर्म का अनुयायी था। उसकी धार्मिक आस्था का उल्लेख उसके अभिलेखीय विवरणों में मिलता है।
- बद्रीनाथ मंदिर को भूमि दान देने के कारण पदमदेव की धार्मिक उदारता एवं दानशीलता विशेष रूप से उल्लेखनीय है।
- अभिलेखीय प्रशस्ति में पदमदेव को सूर्य के समान प्रकाशवान तथा कर्ण से भी अधिक दानदाता बताया गया है।
- उसकी दानशीलता की तुलना बलि, वैकर्तन (कर्ण), दधीचि और विक्रमादित्य जैसे प्रसिद्ध दानवीरों से की गई है।
निष्कर्ष
पदमदेव तृतीय कत्यूरी परिवार के शक्तिशाली, दीर्घकालीन एवं अत्यंत दानशील शासकों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। पाण्डुकेश्वर से प्राप्त ताम्र अभिलेख उसके शासनकाल की प्रमुख जानकारी का स्रोत है। 25 वर्ष से अधिक समय तक शासन करने वाले पदमदेव ने अपने शासन के 25वें वर्ष बद्रीनाथ मंदिर को भूमिदान किया, जो उसकी धार्मिक एवं दानशील प्रवृत्ति को दर्शाता है। वह शैव धर्म का अनुयायी होने के बावजूद बद्रीनाथ जैसे वैष्णव तीर्थ को दान देता था, जो धार्मिक उदारता का संकेत है। उसे सूर्य के समान प्रकाशवान तथा कर्ण से अधिक दानदाता कहा गया है और उसकी तुलना बलि, दधीचि एवं विक्रमादित्य जैसे महान दानियों से की गई है।