यौधेय गणराज्य उत्तराखंड|Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material
परिचय
उत्तराखण्ड के प्राचीन इतिहास में कुणिन्दों के पश्चात् यौधेय गणराज्य का प्रभाव विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। यौधेय मूलतः एक शक्तिशाली गणराज्यीय राजनीतिक शक्ति थे, जिनका प्रभाव उत्तर भारत के साथ-साथ हिमालय की तराई और कुछ पर्वतीय क्षेत्रों तक विस्तृत था। लगभग ईस्वी की तृतीय–चतुर्थ शती में उन्होंने कुषाण सत्ता को चुनौती देते हुए अपनी राजनीतिक शक्ति का विस्तार किया। उत्तराखण्ड में जौनसार-बाबर, कालो डांडा (लैंसडाउन) आदि क्षेत्रों से प्राप्त यौधेय मुद्राएँ इस क्षेत्र में उनके प्रभाव की महत्वपूर्ण पुरातात्त्विक साक्षी हैं। उनकी मुद्राओं पर अंकित ‘यौधेय गणस्य जयः’ तथा कार्तिकेय का चित्रण उनके गणतांत्रिक स्वरूप, सैन्य शक्ति और धार्मिक मान्यताओं की जानकारी प्रदान करता है।
यौधेय गणराज्य प्रमुख तथ्य
- इसवी की तृतीय -चतुर्थ शती के आसपास यौधेय गणराज्य बहुत शक्तिशाली था।
- डॉ अल्तेकर का मानना है कि उत्तर भारत मे कुषाणों को कुचलनें में यौधेय गणराज्य नेतृत्व किया था और इसमें कुणिन्दों ने भी उनकी सहायता की।
- यौधेयों के इतिहास के बारे में जानकारी प्राप्त करने का मुख्य स्रोत उनके द्वारा जारी की गई मुद्राएं हैं। जिससे स्पष्ट होता है कि इनका शासन यमुना व सतलज नदी के मध्य भाग में था।
- यौधेयों की मुद्राओं के आधार पर यह अनुमान लगाया जाता है कि इनका शासन कांगड़ा, शिमला, जौनसार-बाबर, कालो डांडा(लेंसडाउन), सहारनपुर में हुआ करता था।
- जौनसार से 1936 में मुद्राएं प्राप्त हुई।
- यौधेय शासको के द्वि व त्री मुद्रालेख वाले सिक्के प्राप्त हुए है।
- कुषाणों पर उनकी विजय ताम्र मुद्राओ से प्रमाणित होती हैं जिन पर ब्राह्मी में “यौधेय गणस्थ जयः” लेख तथा उनके अधिष्ठाता देवता कार्तिकेय का चित्रण किया गया है।उनकी मुद्राओ के अग्रभाग पर शूलधारी कार्तिकेय तथा पृष्ठभाग पर एक देवी चित्रित है जिसका दक्षिण हस्त उठा है।
- यौधेयों की मुद्रालेख से ज्ञात होता है कि उनमें गण शासन प्रणाली विद्यमान थी।
- मुद्राओ से प्रतीत होता है कि कुषाणों द्वारा विजित कुणिन्द राज्य के दक्षिणी भाग उनके हाथों में आ चुके थे। पर्वतीय भाग भी क्रमशः उनके हाथ में आ गए जहां संभवतः कुछ कुणिन्द सामंत आगे तक उनके अधीन शासन करते रहे।
- प्रयाग प्रशस्ति से ज्ञात होता है कि गुप्त सम्राट समुद्रगुप्त द्वारा यौधेय गण राज्य को विजित किया गया।
निष्कर्ष
इस प्रकार, यौधेय गणराज्य उत्तराखण्ड के प्राचीन राजनीतिक इतिहास में कुणिन्दों के बाद उभरने वाली एक महत्वपूर्ण शक्ति के रूप में दिखाई देता है। उत्तराखण्ड के विभिन्न क्षेत्रों से प्राप्त उनकी मुद्राएँ उनके राजनीतिक एवं सांस्कृतिक प्रभाव को प्रमाणित करती हैं। कुषाणों के विरुद्ध संघर्ष में उनकी भूमिका तथा गण-शासन की परंपरा उनकी विशिष्ट पहचान थी। यद्यपि बाद में समुद्रगुप्त के साम्राज्य विस्तार के साथ उनकी स्वतंत्र सत्ता समाप्त हो गई, फिर भी यौधेयों ने उत्तर भारत तथा उत्तराखण्ड के इतिहास में एक सशक्त गणराज्यीय परंपरा और राजनीतिक प्रतिरोध की महत्वपूर्ण विरासत छोड़ी।