टिहरी रियासत में स्वास्थ्य व्यवस्था
परिचय
टिहरी रियासत में प्रारंभिक दौर में जनता की चिकित्सा व्यवस्था को राज्य के प्रमुख दायित्वों में शामिल नहीं किया गया था। समय के साथ शासकों ने स्वास्थ्य सेवाओं के विकास की दिशा में कदम उठाए। प्रतापशाह के समय राजधानी में पहला खैराती शफाखाना स्थापित हुआ, जबकि कीर्तिशाह ने तीर्थयात्रा मार्गों पर औषधालयों तथा चेचक की रोकथाम के लिए टीकाकरण की व्यवस्था शुरू कराई। नरेन्द्रशाह के शासनकाल में आधुनिक चिकित्सालयों, आयुर्वेदिक औषधालयों तथा स्वास्थ्य संबंधी कानूनों के विकास से टिहरी रियासत की स्वास्थ्य व्यवस्था अधिक संगठित हुई।
टिहरी रियासत की स्वास्थ्य व्यवस्था
1. प्रारंभिक स्थिति
- सुदर्शनशाह एवं भवानीशाह के शासनकाल में प्रजा की चिकित्सा के लिए चिकित्सालय स्थापित करना राज्य के कर्तव्यों में शामिल नहीं माना जाता था।
- राजपरिवार में चिकित्सा की आवश्यकता होने पर वैद्य को बुलाकर उपचार कराया जाता था।
2. प्रतापशाह के समय
- 1876 में प्रतापशाह ने राजधानी में पहला ‘खैराती शफाखाना’ स्थापित किया।
- इस शफाखाने में भारतीय तथा यूरोपीय दोनों चिकित्सा पद्धतियों से उपचार किया जाता था।
3. कीर्तिशाह के समय
- कीर्तिशाह ने तीर्थयात्रा के प्रमुख मार्गों पर छोटे-छोटे औषधालयों की स्थापना कराई।
- उन्होंने चेचक की रोकथाम के लिए टीकाकरण की व्यवस्था प्रारंभ करवाई।
4. नरेन्द्रशाह के समय
- 1925 में नरेन्द्रशाह ने नरेन्द्रनगर में आधुनिक ढंग का चिकित्सालय स्थापित किया।
- इसके अतिरिक्त देवप्रयाग एवं उत्तरकाशी में भी चिकित्सालय स्थापित किए गए।
- 1934 में राज्य में रेड क्रॉस सोसायटी की स्थापना की गई।
- 1939 में राज्य कुष्ठ विधान पारित किया गया।
- 1940 तक राज्य में 15 आयुर्वेदिक डिस्पेन्सरियाँ स्थापित हो चुकी थीं।
- 1941–42 तक राज्य में कुल 16 ग्रामीण आयुर्वेदिक औषधालयों की स्थापना की जा चुकी थी।
- 1943 में राज्य टीका विधान पारित किया गया।
निष्कर्ष
टिहरी रियासत में स्वास्थ्य व्यवस्था का विकास धीरे-धीरे राजपरिवार तक सीमित चिकित्सा से सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की ओर हुआ। प्रारंभ में प्रजा के लिए चिकित्सालय स्थापित करना राज्य का प्रमुख दायित्व नहीं माना जाता था, लेकिन प्रतापशाह के समय 1876 में खैराती शफाखाने की स्थापना से सार्वजनिक चिकित्सा व्यवस्था की शुरुआत हुई। कीर्तिशाह ने औषधालयों और टीकाकरण को बढ़ावा दिया, जबकि नरेन्द्रशाह के समय आधुनिक चिकित्सालयों, ग्रामीण आयुर्वेदिक औषधालयों तथा कुष्ठ एवं टीकाकरण संबंधी विधानों के माध्यम से स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक संस्थागत रूप मिला।