पंवार वंश के प्रमुख अधिकारी एवं उनके कार्य
परिचय
पंवार वंश की प्रशासनिक व्यवस्था में राजा के साथ अनेक उच्च पदाधिकारी एवं कर्मचारी कार्य करते थे। इन अधिकारियों के बीच प्रशासन, सैन्य व्यवस्था, राजस्व, सुरक्षा, धार्मिक कार्य, राजकीय आदेशों के प्रसार तथा विदेशी संबंधों जैसे विभिन्न कार्यों का विभाजन किया गया था। मुख्तार राजा के बाद सबसे शक्तिशाली अधिकारी माना जाता था, जबकि दफ्तरी राज्य के प्रशासनिक कार्यालय का प्रमुख था। फौजदार, गोलदार, नेगी, गुरु, वजीर, वकील तथा देवालयाधीक्षक जैसे अधिकारी भी शासन व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे। अधिकारियों को उनकी सेवाओं के बदले जागीर, नकद अथवा अनाज के रूप में पारिश्रमिक दिया जाता था।
पंवार वंश के प्रमुख अधिकारी एवं उनके कार्य
- मुख्तार — राज्य का सर्वोच्च मंत्री होता था। राजा के बाद मुख्तार सबसे शक्तिशाली अधिकारी माना जाता था। दुर्बल नरेशों के समय मुख्तार कई बार संपूर्ण राजकीय शक्ति अपने हाथों में ले लेते थे।
- दफ्तरी — पंवार राज्य में दफ्तरी एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक अधिकारी था। उसका कार्यालय लगभग सचिवालय की तरह कार्य करता था।राज्य के कर्मचारियों की नियुक्ति एवं स्थानांतरणवेतन, पुरस्कार एवं दंडजागीर संबंधी कार्यराजकीय आदेशों का प्रचारराजा के आदेशों को संबंधित अधिकारियों तक पहुँचानाजैसे कार्य दफ्तरी के अधीन थे। राजधानी में दफ्तरी का केंद्रीय कार्यालय होता था तथा प्रत्येक परगने में परगना दफ्तरी के कार्यालय होते थे।
- फौजदार — फौजदार सैनिक अधिकारी होते थे और उन्हें परगनों में नियुक्त किया जाता था। उनके प्रमुख कार्य थे—परगने में शांति एवं सुव्यवस्था बनाए रखनासीमाओं की रक्षा करनाराजस्व वसूली में सहायता करनाआवश्यकता पड़ने पर सेना सहित युद्ध क्षेत्र में पहुँचना।
- गोलदार — राजधानी के सुरक्षा अधिकारी गोलदार कहलाते थे। वे अपने अधीन सैनिकों की सहायता से राजकोष, राजसभा तथा महत्वपूर्ण राजकीय कार्यालयों की सुरक्षा करते थे।
- नेगी — नेगी पंवार राज्य के उच्च अधिकारियों में शामिल थे। वे कुलीन परिवारों के प्रतिनिधि माने जाते थे। राजा महत्वपूर्ण मामलों में उनसे परामर्श लेता था। नेगी का पद वंशानुगत होता था।
- गुरु — गुरु का मंत्रिमंडल में महत्वपूर्ण स्थान था। शुक्रनीति में गुरु के लिए ‘पंडित’ शब्द का प्रयोग मिलता है। पंवार अभिलेखों में विभिन्न राजाओं के समय अनेक गुरुओं का उल्लेख मिलता है—
- श्यामशाह के समय — शंकर गुरु
- फतेहपति शाह के समय — श्रीनिवास गुरु
- प्रद्युम्न शाह के समय — श्रीपति गुरु
- आगे चलकर गुरु को ‘धर्माधिकारी’ कहा जाने लगा। वह धर्म संबंधी प्रश्नों का निर्णायक होता था।
- वजीर — वजीर राज्य के प्रमुख प्रशासनिक अधिकारियों में से एक था। विभिन्न पंवार शासकों के समय निम्न व्यक्तियों के वजीर होने का उल्लेख मिलता है—
- महीपति शाह — माधो सिंह भंडारी
- पृथ्वीपति शाह — गजे सिंह भंडारी
- फतेहपति शाह — रंगी बिष्ट
- जयकीर्ति शाह — जयदेव डंगवाल
- सुदर्शन शाह — दुर्गादत्त पैन्यूली।
- वकील — वकील राजा के अन्य राज्यों में प्रतिनिधि होते थे तथा वैदेशिक/अंतर-राज्यीय संबंधों से संबंधित कार्य करते थे।
- देवालयाधीक्षक — देवालयों के प्रबंधन के लिए नियुक्त अधिकारी को देवालयाधीक्षक कहा जाता था। गढ़भूमि में अनेक प्रसिद्ध मंदिर होने के कारण इस पद का विशेष महत्व था। प्रद्युम्न शाह एवं सुदर्शन शाह के शासनकाल में हरिदत्त शास्त्री के देवालयाधीक्षक होने का उल्लेख मिलता है।
- दानाध्यक्ष — राज्य में दान संबंधी कार्यों के लिए दानाध्यक्ष नामक अधिकारी भी होता था।अन्य कर्मचारी
- खवास-खवासिन — राजपरिवार के सेवक एवं सेविकाएँ।
- चाकर — पंवार राजवंश में राजसभा एवं राजप्रसाद में अर्दली/सेवक का कार्य करने वालों को चाकर कहा जाता था।
- चोपदार — राजा के साथ चाँदी का दंड लेकर चलने वाला कर्मचारी चोपदार कहलाता था।
- सोदी — राजपरिवार के लिए भोजन की व्यवस्था करता था।
- चंड — संदेशवाहक का कार्य करता था।
- चणु — तीव्रगामी संदेशवाहक को चणु कहा जाता था।अधिकारियों एवं कर्मचारियों का वेतन
- पंवार प्रशासन में उच्च पदाधिकारियों को उनके पद एवं सेवाओं के बदले जागीर के रूप में वेतन दिया जाता था।
- सामान्य कर्मचारियों को उनके व्यय के लिए कुछ नकद राशि भी दी जाती थी।
- कुछ कर्मचारियों को प्रत्येक फसल के समय गाँव से अनाज की निश्चित मात्रा ‘नाली’ के रूप में दी जाती थी।
- इस प्रकार पंवार प्रशासन में पारिश्रमिक की व्यवस्था जागीर, नकद तथा अनाज—तीनों रूपों में दिखाई देती है।
निष्कर्ष
पंवार वंश की प्रशासनिक व्यवस्था में विभिन्न अधिकारियों के बीच कार्य-विभाजन एवं उत्तरदायित्व स्पष्ट दिखाई देता है। मुख्तार राज्य का सर्वोच्च मंत्री था, दफ्तरी प्रशासनिक अभिलेख एवं राजकीय आदेशों का प्रमुख अधिकारी था, जबकि फौजदार और गोलदार क्रमशः सैन्य एवं सुरक्षा व्यवस्था संभालते थे। नेगी राजा को महत्वपूर्ण मामलों में परामर्श देते थे तथा गुरु धार्मिक मामलों के निर्णायक थे। वजीर एवं वकील जैसे अधिकारियों ने प्रशासन और अंतर-राज्यीय संबंधों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। देवालयाधीक्षक तथा दानाध्यक्ष जैसे पद धार्मिक एवं सामाजिक कार्यों की व्यवस्था से जुड़े थे। इसके अतिरिक्त चाकर, चोपदार, सोदी और संदेशवाहकों जैसे कर्मचारियों ने राजपरिवार एवं प्रशासन की दैनिक आवश्यकताओं को पूरा किया। अधिकारियों को जागीर, नकद और अनाज के रूप में पारिश्रमिक देना पंवारकालीन प्रशासन की उल्लेखनीय विशेषता थी।