राजा कल्याणपाल |Parmar/Panwar Dynasty|Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material
परिचय
राजा अजयपाल के बाद गढ़वाल के पंवार/परमार राजवंश की सत्ता उनके पुत्र कल्याणपाल के हाथों में आई। कल्याणपाल का महत्व मुख्यतः उनके द्वारा प्रयुक्त ‘शाह’ उपाधि के कारण है। उपलब्ध परंपराओं के अनुसार वे पंवार राजवंश के ऐसे प्रारंभिक शासक थे, जिन्होंने अपने नाम के आगे ‘शाह’ लगाना आरंभ किया। इस दृष्टि से बलभद्र शाह से पहले ‘शाह’ उपाधि धारण करने वाले शासक के रूप में कल्याणपाल का उल्लेख विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। उनके बाद वंश में उत्तराधिकार का क्रम भी विभिन्न वंशावलियों में मिलता है।
प्रमुख बिंदु
- कल्याणपाल, राजा अजयपाल के पुत्र और उनके उत्तराधिकारी थे।
- अजयपाल की मृत्यु के बाद कल्याणपाल ने पंवार/परमार राजवंश की सत्ता संभाली।
- कल्याणपाल को पंवार राजवंश का अपने नाम के आगे ‘शाह’ उपाधि धारण करने वाला प्रथम शासक माना जाता है।
- बलभद्र शाह से पहले ‘शाह’ उपाधि धारण करने वाले शासक के रूप में कल्याणपाल का उल्लेख मिलता है।
- ‘शाह’ उपाधि का प्रयोग पंवार शासकों की आगे की परंपरा में भी दिखाई देता है और बाद के कई शासक इसी उपाधि से प्रसिद्ध हुए।
- बैकेट की वंशावली के अनुसार कल्याण शाह के बाद क्रमशः सुन्दरपाल, हंसदेवपाल और विजयपाल सिंहासन पर आसीन हुए।
- इस प्रकार कल्याणपाल का शासन पंवार वंश में ‘पाल’ से ‘शाह’ नाम-परंपरा की ओर संक्रमण के अध्ययन की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
निष्कर्ष
राजा कल्याणपाल पंवार/परमार वंश के इतिहास में अजयपाल के उत्तराधिकारी के रूप में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। उनका सबसे प्रमुख ऐतिहासिक महत्व ‘शाह’ उपाधि के प्रारंभिक प्रयोग से जुड़ा है। उन्हें बलभद्र शाह से पूर्व इस उपाधि को धारण करने वाला पहला पंवार शासक माना जाता है। इससे पंवार राजवंश की नाम एवं उपाधि-परंपरा में महत्वपूर्ण परिवर्तन दिखाई देता है। बैकेट की वंशावली कल्याण शाह के बाद सुन्दरपाल, हंसदेवपाल और विजयपाल के उत्तराधिकार क्रम का उल्लेख करती है। इस प्रकार कल्याणपाल का स्थान अजयपाल के बाद के पंवार शासन और आगे विकसित होने वाली ‘शाह’ उपाधि की राजकीय परंपरा को समझने में महत्वपूर्ण है।