कनकपाल का आदि स्थान |Parmar Dynasty|Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material
परिचय
पंवार/परमार वंश के इतिहास में राजा कनकपाल के आदि स्थान का प्रश्न एक महत्वपूर्ण एवं विवादित विषय है। परंपरागत विवरणों में कनकपाल को गढ़वाल के पंवार/परमार वंश का संस्थापक माना गया है, किंतु वे गढ़वाल में कहाँ से आए थे, इस विषय में इतिहासकारों के अलग-अलग मत हैं। कुछ विद्वान उन्हें धारा नगरी से आया हुआ मानते हैं, जबकि पातीराम ने उनके मालवा से आने की बात कही है। दूसरी ओर, चाँदपुर शिलालेख में परमार राजाओं को गुर्जर प्रदेश का निवासी बताया गया है, जिसे उनके मूल स्थान के संबंध में महत्वपूर्ण प्रमाण माना जाता है। अतः कनकपाल के आदि स्थान को निर्धारित करने में विभिन्न साहित्यिक एवं अभिलेखीय स्रोतों का तुलनात्मक अध्ययन आवश्यक है।
कनकपाल के आदि स्थान के संबंध में प्रमुख मत
- हरिकृष्ण रतूड़ी का मत — पंडित हरिकृष्ण रतूड़ी के अनुसार कनकपाल धारा नगरी से गढ़वाल आए थे। उनके मत में धारा नगरी पंवार/परमार वंश से संबंधित महत्वपूर्ण स्थान था।
- एटकिंसन का मत — एटकिंसन के अनुसार धारा नगरी के पंवार वंश का एक युवक पर्वतीय क्षेत्र के पवित्र स्थानों की यात्रा के लिए आया था। यात्रा के दौरान वह सोनपाल के राज्य में पहुँचा और सोनपाल उससे अत्यधिक प्रभावित हुए। इसके बाद सोनपाल ने अपनी पुत्री का विवाह उस युवक से कर दिया तथा दहेज के रूप में चाँदपुर का परगना प्रदान किया। यही युवक परंपरा में कनकपाल माना जाता है। वॉल्टन ने भी एटकिंसन के मत का समर्थन किया है।
- भक्त दर्शन का मत — भक्त दर्शन ने भी कनकपाल को धारा नगरी से आया हुआ माना है। इस प्रकार उनका मत हरिकृष्ण रतूड़ी तथा एटकिंसन के मत के अनुरूप है।
- पातीराम का मत — पातीराम ने अपनी पुस्तक ‘गढ़वाल एन्शिएंट एण्ड मॉडर्न’ में कनकपाल के मालवा से गढ़वाल आने का उल्लेख किया है।
- चाँदपुर शिलालेख का प्रमाण — कनकपाल के मूल स्थान के संबंध में चाँदपुर शिलालेख को महत्वपूर्ण प्रमाण माना जाता है। इसमें परमार राजाओं को चंद्रवंशी परमार तथा गुर्जर प्रदेश का निवासी बताया गया है। इस आधार पर कनकपाल के गुर्जर प्रदेश से आने का मत अधिक प्रमाणिक प्रतीत होता है।
- गुर्जर प्रदेश की व्यापकता — प्रसिद्ध विद्वान कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी की रचना The Glory That Was Gurjaradesa में राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश के एक भाग मालवा तथा गुजरात को व्यापक रूप से गुर्जर प्रदेश से जोड़ा गया है। इसलिए ‘गुर्जर प्रदेश’ को केवल वर्तमान गुजरात तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए।
निष्कर्ष
कनकपाल के आदि स्थान के संबंध में विभिन्न विद्वानों के मतों में पर्याप्त भिन्नता दिखाई देती है। हरिकृष्ण रतूड़ी, एटकिंसन, भक्त दर्शन और वॉल्टन उन्हें धारा नगरी से जोड़ते हैं, जबकि पातीराम उनके मूल स्थान के रूप में मालवा का उल्लेख करते हैं। दूसरी ओर, चाँदपुर शिलालेख परमार राजाओं को गुर्जर प्रदेश का निवासी बताता है, जो इस विषय में अपेक्षाकृत महत्वपूर्ण अभिलेखीय प्रमाण है। गुर्जर प्रदेश की भौगोलिक अवधारणा को व्यापक रूप में स्वीकार करने पर इसमें गुजरात तथा मालवा सहित राजस्थान और अन्य क्षेत्र भी सम्मिलित माने गए हैं। अतः उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर कनकपाल के गुर्जर प्रदेश से गढ़वाल आने का मत महत्वपूर्ण प्रतीत होता है, जबकि धारा नगरी और मालवा संबंधी मत भी परंपरागत इतिहास-लेखन में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।