लाखामंडल का खंडित शिलालेख
परिचय
लाखामंडल का खंडित शिलालेख उत्तराखंड की प्राचीन राजनीतिक एवं राजवंशीय परंपरा को समझने वाला एक महत्वपूर्ण अभिलेखीय स्रोत है। यह देहरादून जनपद के लाखामंडल क्षेत्र से संबंधित है। इस अभिलेख में यमुना नदी के क्षेत्र में शासन करने वाले एक प्राचीन राजवंश की वंशावली का उल्लेख मिलता है। अभिलेख खंडित अवस्था में होने के बावजूद इसमें सात राजाओं के नाम स्पष्ट रूप से प्राप्त होते हैं। इसके आधार पर प्राचीन यमुना घाटी के राजनीतिक इतिहास के पुनर्निर्माण में महत्वपूर्ण सहायता मिलती है।
लाखामंडल का खंडित शिलालेख प्रमुख तथ्य
- लाखामंडल का खंडित शिलालेख एक प्राचीन राजवंश से संबंधित है।
- लाखामंडल वर्तमान उत्तराखंड के देहरादून जनपद में स्थित है।
- यह वंश यामुन प्रदेश, अर्थात् यमुना नदी के क्षेत्र, में लगभग 5वीं शताब्दी ईस्वी के आसपास शासन करता था।
- अभिलेख के खंडित होने के बावजूद इसमें 7 राजाओं के नाम स्पष्ट रूप से प्राप्त होते हैं।
- अभिलेख में उल्लिखित प्रथम राजा का नाम नरपति जयदास मिलता है।
- अभिलेख में उल्लिखित वंशावली के अंतिम राजा का नाम नामक्षत मिलता है।
- अभिलेख के अपूर्ण होने के कारण इन राजाओं के शासनकाल, राज्य-विस्तार एवं प्रशासनिक व्यवस्था के संबंध में निश्चित जानकारी सीमित है।
- लाखामंडल का यह अभिलेख उत्तराखंड की प्राचीन यमुना घाटी के राजनीतिक इतिहास के पुनर्निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
निष्कर्ष
लाखामंडल का खंडित शिलालेख उत्तराखंड की प्राचीन यमुना घाटी के राजनीतिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। अभिलेख के अपूर्ण होने के कारण इससे संबंधित राजाओं के शासनकाल और राज्य की सीमाओं की पूरी जानकारी प्राप्त नहीं होती, फिर भी इसमें सुरक्षित सात राजाओं की वंशावली इस क्षेत्र में विकसित प्राचीन राजसत्ता की महत्वपूर्ण झलक प्रदान करती है। नरपति जयदास से लेकर नामक्षत तक के राजाओं का उल्लेख इस अभिलेख को विशेष ऐतिहासिक महत्व देता है। इस प्रकार, लाखामंडल का शिलालेख उत्तराखंड के प्रारंभिक ऐतिहासिक काल और यमुना घाटी की राजनीतिक परंपरा के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रस्तुत करता है।