राजा देवी चंद |Chand Dynasty|Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material

परिचय

राजा देवी चंद चंद वंश के इतिहास में उस दौर के शासक थे, जब कुमाऊँ की पूर्ववर्ती राजनीतिक शक्ति धीरे-धीरे कमजोर होने लगी थी। 1720 ई. में राजा जगत चंद की मृत्यु के बाद उनके बड़े पुत्र देवीसिंह गद्दी पर बैठे। उनके शासनकाल से चंद राज्य के अवनति काल की शुरुआत मानी जाती है। इस समय राजसत्ता पर गैड़ा बिष्ट माणिकमल और उसके पुत्र पूरनमल जैसे दरबारियों का प्रभाव बढ़ गया था। देवी चंद ने स्वयं को प्राचीन विक्रमादित्य के समान प्रतिष्ठित करने के प्रयास में राजकोष का भारी धन खर्च किया। उनके शासन में गढ़वाल के साथ रणचूलाकोट और गणाई के युद्ध, रोहिलों की गतिविधियाँ तथा अंततः दरबारी षड्यंत्र के कारण उनकी हत्या जैसी घटनाएँ हुईं।।

प्रमुख बिंदु

  • 1720 ई. में राजा जगत चंद की मृत्यु के बाद उनके बड़े पुत्र देवीसिंह चंद राज्य की गद्दी पर बैठे और देवी चंद के नाम से प्रसिद्ध हुए।
  • बरम ताम्रपत्र में उनका उल्लेख ‘महाराजकुमार श्री देवीसिंह गुसाईं’ के रूप में मिलता है।
  • झिझाड़ (चंपावत) ताम्रपत्र में उन्हें ‘महाराजकुमार श्री देवीसिंह गुसाईं ज्यू’ कहा गया है।
  • राजा देवी चंद के शासनकाल से चंद राज्य के अवनति काल की शुरुआत मानी जाती है।
  • उत्तराखंड में रोहिलों के आक्रमणों की शुरुआत भी देवी चंद के शासनकाल से मानी जाती है।
  • देवी चंद के प्रमुख सलाहकारों में गैड़ा बिष्ट माणिकमल और उसका पुत्र पूरनमल प्रमुख थे। राजकाज में इन दोनों का प्रभाव अत्यधिक बढ़ गया था।
  • माणिकमल और पूरनमल तथा अन्य दरबारियों ने देवी चंद को महाराज विक्रमादित्य जैसा बनने की सलाह दी।
  • विक्रमादित्य बनने की महत्वाकांक्षा में देवी चंद ने अपने राज्य के राजकोष का भारी धन खर्च कर दिया। इसी कारण उन्हें परंपरा में ‘कुमाऊँ का विक्रमादित्य’ कहा जाता है।
  • देवी चंद ने अफगान सेनापति दाऊद खाँ को अपनी सेना का सेनापति बनाया। दाऊद खाँ ने दिल्ली पर आक्रमण किया और इन अभियानों में कुमाऊँ के राजकोष का काफी धन खर्च हुआ।
  • देवी चंद के बारे में यह भी कहा जाता है कि विक्रमादित्य बनने की चाह में उन्होंने कुमाऊँ का लगभग सारा खजाना लुटा दिया था। यह उनके शासन की आर्थिक अव्यवस्था को दर्शाने वाली परंपरा है।
  • देवी चंद ने श्रीनगर विजय का प्रयास किया, लेकिन इसमें उन्हें सफलता नहीं मिली। इसी अभियान के दौरान उन्होंने एक पहाड़ी पर अधिकार कर उसका नाम ‘फतेहपुर’ रखा।
  • उनकी इन महत्वाकांक्षी और अव्यावहारिक नीतियों के कारण एटकिंसन और रुद्रदत्त पंत ने उनके शासन की आलोचना की है।
  • उनके शासन की तुलना मुहम्मद बिन तुगलक से की गई है और उन्हें ‘कुमाऊँ का मुहम्मद बिन तुगलक’ कहा गया है। यह तुलना मुख्यतः उनकी महत्वाकांक्षी तथा अव्यावहारिक नीतियों और अत्यधिक धन-व्यय के संदर्भ में की जाती है।
  • राजा देवी चंद को ‘कुमाऊँ का रंगीला बादशाह’ भी कहा जाता है।
  • देवी चंद का धार्मिक पक्ष भी उल्लेखनीय था। उन्होंने जागेश्वर धाम में अपनी तथा अपनी रानी की मूर्तियाँ स्थापित करवाई थीं।
  • रणचूलाकोट का युद्ध गढ़वाल के राजा प्रदीप शाह और देवी चंद के बीच हुआ। इस युद्ध में गढ़वाली सेना को पराजय का सामना करना पड़ा।
  • इसके बाद गणाई का युद्ध भी प्रदीप शाह और देवी चंद के बीच हुआ। इस युद्ध में गढ़वाली सेना विजयी रही।
  • देवी चंद की हत्या उनके प्रभावशाली बिष्ट दरबारियों—माणिक बिष्ट और उसके पुत्र पूरनमल द्वारा किए जाने का उल्लेख मिलता है।
  • देवी चंद की मृत्यु के बाद चंद राज्य में उत्तराधिकार का संकट और राजनीतिक अस्थिरता बढ़ी। इसके बाद क्रमशः अजीत चंद, कल्याण चंद, दीप चंद, मोहन चंद, प्रद्युम्न चंद, शिव चंद और महेन्द्र चंद आदि शासक गद्दी पर बैठे।
  • महेन्द्र चंद को चंद वंश का अंतिम शासक माना जाता है।

निष्कर्ष

राजा देवी चंद का शासन चंद वंश के इतिहास में उत्कर्ष से अवनति की ओर बढ़ते संक्रमण का महत्वपूर्ण चरण था। उनके समय में राजसत्ता पर दरबारियों का प्रभाव बढ़ा और रोहिलों के आक्रमणों की शुरुआत हुई। गैड़ा बिष्ट माणिकमल और पूरनमल के प्रभाव में देवी चंद ने स्वयं को विक्रमादित्य के समान प्रतिष्ठित करने का प्रयास किया और इस महत्वाकांक्षा में राजकोष का भारी धन खर्च किया। इसी कारण उन्हें ‘कुमाऊँ का विक्रमादित्य’ तथा उनकी अव्यावहारिक नीतियों के कारण ‘कुमाऊँ का मुहम्मद बिन तुगलक’ कहा गया। गढ़वाल के साथ रणचूलाकोट और गणाई के युद्ध भी उनके शासन की प्रमुख घटनाएँ थीं। धार्मिक रूप से उन्होंने जागेश्वर में अपनी और अपनी रानी की मूर्तियाँ स्थापित करवाईं। अंततः माणिक बिष्ट और पूरनमल द्वारा उनकी हत्या किए जाने के बाद चंद राज्य में राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ गई। उनके बाद आने वाले कमजोर शासकों के काल में चंद सत्ता का क्रमिक पतन आगे बढ़ता गया।

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