दुमग का गढ़पति मण्डलसिंह |Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material

परिचय

कार्तिकेयपुरवंशीय सत्ता के पतन के पश्चात् उत्तराखण्ड के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक स्थानीय गढ़पतियों और स्वतंत्र कुलों का उदय हुआ। गढ़वाल क्षेत्र में दुमग भी ऐसी ही एक स्थानीय सत्ता का केन्द्र था। दुमग के गढ़पति मण्डलसिंह के संबंध में जानकारी मुख्यतः टिहरी गढ़वाल राज्य अभिलेखागार में सुरक्षित एक हस्तलेख तथा रामायणप्रदीप से प्राप्त होती है। उपलब्ध सामग्री में उनके वंश तथा कण्डारागढ़ में शासन का उल्लेख मिलता है, यद्यपि इसका अधिकांश विवरण अनुश्रुतियों पर आधारित है।

प्रमुख बिंदु

  • टिहरी गढ़वाल राज्य अभिलेखागार के एक हस्तलेख में गढ़वाल का ऐतिहासिक वृत्तान्त मिलता है, जो मुख्यतः अनुश्रुतियों पर आधारित है।
  • इस हस्तलेख के अनुसार, 1275 ई. में नागपुर की मन्दाकिनी घाटी में दुमग के राजा भानुप्रताप के पुत्र मण्डलसिंह कण्डारागढ़ में शासन कर रहे थे।
  • यदि 1275 को विक्रम संवत् माना जाए, तो यह तिथि लगभग 1218 ई. होती है।
  • इस वृत्तान्त की पुष्टि रामायणप्रदीप में भी मिलती है, जहाँ पाठान्तर के साथ ‘दुर्मार्गदेशाधिपति अतिशूर मण्डलसेन’ का उल्लेख मिलता है।
  • हस्तलेख में मण्डलसिंह के वंशजों द्वारा कई पीढ़ियों तक गढ़वाल पर शासन करने का उल्लेख किया गया है।
  • उपलब्ध परंपरा के अनुसार, कण्डारागढ़ का अंतिम गढ़पति राजा नरवीरसिंह था।
  • कालांतर में दुमग राज्य परमारों के अधीन हो गया।

निष्कर्ष

दुमग के गढ़पति मण्डलसिंह का इतिहास उत्तराखण्ड में कार्तिकेयपुरवंशीय सत्ता के पतन के बाद उत्पन्न स्थानीय गढ़पतियों और क्षेत्रीय राजसत्ताओं की स्थिति को समझने में महत्वपूर्ण है। उनका संबंध नागपुर की मन्दाकिनी घाटी तथा कण्डारागढ़ से बताया गया है। टिहरी गढ़वाल राज्य अभिलेखागार के हस्तलेख में भानुप्रताप के पुत्र मण्डलसिंह के शासन तथा उनके वंशजों द्वारा कई पीढ़ियों तक गढ़वाल में शासन करने की परंपरा मिलती है। रामायणप्रदीप में प्राप्त ‘अतिशूर मण्डलसेन’ का उल्लेख इस परंपरा को अतिरिक्त आधार प्रदान करता है। हालांकि, इस वृत्तान्त का बड़ा भाग अनुश्रुति-आधारित है, इसलिए इसके तथ्यों का मूल्यांकन सावधानीपूर्वक किया जाना चाहिए। बाद में दुमग राज्य का परमारों के अधीन हो जाना गढ़वाल में क्षेत्रीय शक्तियों के क्रमिक एकीकरण की प्रक्रिया को दर्शाता है।

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