राजा कनकपाल |Parmar/Panwar Dynasty|Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material
परिचय
कनकपाल को गढ़वाल के पंवार/परमार वंश का संस्थापक एवं आदि पुरुष माना जाता है। उनके प्रारंभिक जीवन और गढ़वाल आगमन के संबंध में विभिन्न इतिहासकारों एवं स्रोतों में अलग-अलग मत मिलते हैं। परंपरा के अनुसार वे गुजरात/धारा नगरी क्षेत्र से तीर्थयात्रा के उद्देश्य से गढ़वाल आए और चाँदपुर गढ़ के शासक भानुप्रताप (सोनपाल) के संपर्क में आए। भानुप्रताप ने उनसे प्रभावित होकर अपनी पुत्री सुचित्रवीणा का विवाह कनकपाल से किया तथा उन्हें अपना उत्तराधिकारी बनाया। कनकपाल के साथ जुड़ी चाँदपुर गढ़, गुर्जर प्रदेश, धारा नगरी और परमार वंश संबंधी परंपराएँ गढ़वाल के प्रारंभिक पंवार इतिहास को समझने में महत्वपूर्ण हैं।
प्रमुख तथ्य
- कनकपाल को पंवार/परमार वंश का संस्थापक एवं आदि पुरुष माना जाता है। किसी वंश की स्थापना करने वाले व्यक्ति को उस वंश का आदि पुरुष कहा जाता है।
- परंपरा के अनुसार कनकपाल गुजरात से उत्तराखंड में तीर्थयात्रा के लिए आए थे। गढ़वाल में उनकी मुलाकात चाँदपुर गढ़ के शासक भानुप्रताप से हुई।
- भानुप्रताप कनकपाल से प्रभावित हुए और उन्होंने अपनी पुत्री सुचित्रवीणा का विवाह कनकपाल से कर दिया तथा उन्हें अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया।
- चाँदपुर गढ़ कनकपाल के प्रारंभिक राजनीतिक जीवन से संबंधित प्रमुख स्थान माना जाता है।
- परंपरा के अनुसार 9वीं शताब्दी में गढ़वाल में 52 ठकुरी राजाओं का शासन था, जिनमें चाँदपुर गढ़ भी एक प्रमुख गढ़ था। इसके शासक के रूप में भानुप्रताप का उल्लेख मिलता है।
- भानुप्रताप का दूसरा नाम सोनपाल भी बताया जाता है। इसलिए स्रोतों में भानुप्रताप और सोनपाल दोनों नामों का उल्लेख मिलता है।
- हरिकृष्ण रतूड़ी तथा एटकिंसन के अनुसार कनकपाल धारा नगरी से चाँदपुर गढ़ तीर्थयात्रा के लिए आए थे।
- हरिकृष्ण रतूड़ी के अनुसार कनकपाल धार नरेश वाकपति के छोटे भाई थे।
- पातीराम ने अपनी पुस्तक गढ़वाल एन्शिएंट एण्ड मॉडर्न में कनकपाल के मालवा से गढ़वाल आने का उल्लेख किया है।
- कुछ इतिहासकार कनकपाल को गुर्जर प्रदेश से आया हुआ मानते हैं। उनके अनुसार गुजरात तथा मालवा का कुछ भाग व्यापक रूप से गुर्जर प्रदेश के अंतर्गत माना जाता था।
- कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी की पुस्तक The Glory That Was Gurjaradesa में मालवा तथा गुजरात के कुछ क्षेत्रों को गुर्जर प्रदेश से संबंधित बताया गया है।
- कनकपाल के गुर्जर प्रदेश से संबंध के समर्थन में आदि बदरी मंदिर की स्थापत्य शैली को भी उल्लेखित किया जाता है, जिसकी शैली को गुजरात के सोलंकी मंदिरों से साम्य रखने वाला माना गया है।
- चाँदपुर शिलालेख में परमार राजाओं को चंद्रवंशी परमार तथा गुर्जर प्रदेश का निवासी बताया गया है। यह कनकपाल के मूल स्थान के संबंध में महत्वपूर्ण प्रमाण माना जाता है।
- कनकपाल का शौनक गोत्र बताया जाता है।
- कवि देवराज ने अपनी रचना गढ़वाल राज्ञा वंशावली में कनकपाल का उल्लेख किया है तथा उन्हें ‘स्वर्णपाल’ नाम से भी संबोधित किया है।
निष्कर्ष
राजा कनकपाल गढ़वाल के पंवार/परमार राजवंश के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। परंपरागत इतिहास में उन्हें वंश का संस्थापक और आदि पुरुष माना जाता है तथा उनका संबंध चाँदपुर गढ़ के भानुप्रताप/सोनपाल से जोड़ा जाता है। उनके गढ़वाल आगमन को लेकर धारा नगरी, मालवा और गुर्जर प्रदेश से संबंधित विभिन्न मत मिलते हैं। हरिकृष्ण रतूड़ी, एटकिंसन और पातीराम के विवरण इस विषय को अलग-अलग दृष्टिकोण से प्रस्तुत करते हैं, जबकि चाँदपुर शिलालेख में परमारों को गुर्जर प्रदेश का निवासी बताया गया है। कनकपाल का विवाह सुचित्रवीणा से तथा उन्हें उत्तराधिकारी बनाए जाने की परंपरा भी उनके गढ़वाल में सत्ता स्थापित करने की प्रक्रिया को समझने में महत्वपूर्ण है। इस प्रकार कनकपाल का व्यक्तित्व गढ़वाल में पंवार सत्ता की स्थापना की आधारभूत कड़ी के रूप में प्रस्तुत होता है।