उद्यानचंद |Chand Dynasty|Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material
परिचय
उद्यानचंद चंद वंश के उन शासकों में माने जाते हैं, जिनके समय में धार्मिक एवं लोककल्याणकारी निर्माण कार्यों को विशेष महत्व मिला। परंपरागत विवरणों के अनुसार, उनके दादा गरुड़ ज्ञानचंद द्वारा वीर सेनानायक नीलू कठायत के साथ किए गए छलपूर्ण व्यवहार से उद्यानचंद को आत्मग्लानि हुई। इसी भावना से प्रेरित होकर उन्होंने विभिन्न स्थानों पर मंदिरों और नौलों का निर्माण एवं जीर्णोद्धार कराया तथा ब्राह्मणों के माध्यम से पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान करवाए। उनके समय में चंपावत का बालेश्वर मंदिर विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।
प्रमुख बिंदु
- गरुड़ ज्ञानचंद उद्यानचंद के दादा थे। परंपरागत विवरणों के अनुसार, गरुड़ ज्ञानचंद ने अपने वीर सेनानायक नीलू कठायत को धोखे से मरवा दिया था। इस घटना को उद्यानचंद ने अत्याचारपूर्ण कार्य माना और इससे उन्हें आत्मग्लानि हुई।
- नीलू कठायत के साथ हुए इस व्यवहार के प्रायश्चित स्वरूप उद्यानचंद ने विभिन्न स्थानों पर मंदिरों और नौलों का निर्माण एवं जीर्णोद्धार कराया। इसके साथ ही उन्होंने ब्राह्मणों से पूजा-पाठ तथा धार्मिक अनुष्ठान भी करवाए।
- उद्यानचंद के धार्मिक एवं लोककल्याणकारी कार्यों में चंपावत का बालेश्वर मंदिर विशेष रूप से उल्लेखनीय है। उनके द्वारा इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराए जाने की परंपरा मिलती है।
- बद्रीदत्त पांडे के अनुसार, चंपावत में बालेश्वर मंदिर का निर्माण ही उद्यानचंद ने कराया था। इस मत के अनुसार मंदिर निर्माण के बाद उन्होंने एक वर्ष की मालगुजारी समस्त प्रजा के लिए माफ कर दी थी।
- बालेश्वर मंदिर से संबंधित निर्माण कार्य में कुंज शर्मा तिवारी नामक ब्राह्मण की महत्वपूर्ण भूमिका बताई जाती है। उन्होंने उद्यानचंद के धार्मिक एवं मंदिर संबंधी कार्यों में सहयोग प्रदान किया।
- परंपरागत विवरणों के अनुसार, कुंज शर्मा तिवारी गुजरात से चंपावत आए हुए ब्राह्मण थे। उद्यानचंद के समय उनके सहयोग से धार्मिक कार्यों को आगे बढ़ाने में सहायता मिली।
- उद्यानचंद के संबंध में उपलब्ध विवरणों से उनके शासनकाल में धार्मिक निर्माण, प्रायश्चित और लोककल्याण की प्रवृत्ति का उल्लेख मिलता है। मंदिरों और नौलों का निर्माण केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सार्वजनिक उपयोग की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण था।
निष्कर्ष
उद्यानचंद का व्यक्तित्व चंद वंश के इतिहास में धार्मिक भावना और लोककल्याणकारी कार्यों से जुड़ा हुआ दिखाई देता है। परंपरा के अनुसार, अपने दादा गरुड़ ज्ञानचंद द्वारा नीलू कठायत के साथ किए गए छलपूर्ण व्यवहार से उत्पन्न आत्मग्लानि ने उन्हें धार्मिक एवं जनोपयोगी कार्यों की ओर प्रेरित किया। उन्होंने विभिन्न स्थानों पर मंदिरों और नौलों का निर्माण या जीर्णोद्धार कराया तथा धार्मिक अनुष्ठानों को प्रोत्साहन दिया। चंपावत का बालेश्वर मंदिर उनके समय से जुड़ा सबसे महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है। बद्रीदत्त पांडे द्वारा मंदिर निर्माण तथा एक वर्ष की मालगुजारी माफी का उल्लेख विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। इन विवरणों के कारण उद्यानचंद को चंदकालीन धार्मिक एवं लोककल्याणकारी परंपरा के एक उल्लेखनीय शासक के रूप में देखा जाता है।