राजा पूर्ण चंद |Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material
परिचय
राजा पूर्ण चंद चंद वंश के प्रारंभिक शासकों में उल्लेखित एक शासक था। उसके शासनकाल से संबंधित विवरण मुख्यतः परंपरागत एवं वंशावली स्रोतों से प्राप्त होते हैं। कहा जाता है कि पूर्ण चंद को शिकार का विशेष शौक था और वह अपना काफी समय तराई-भाबर क्षेत्र में शिकार करने में व्यतीत करता था। परिणामस्वरूप उसका ध्यान नियमित राजकाज से कम हो गया। बाद में उसने अपने संपूर्ण राज्य का दायित्व अपने पुत्र को सौंप दिया और स्वयं धार्मिक जीवन की ओर उन्मुख होकर माता पूर्णागिरी की सेवा एवं आराधना में तल्लीन हो गया।
प्रमुख तथ्य
- पूर्ण चंद चंद वंश का प्रारंभिक शासक माना जाता है, जिसके संबंध में विवरण मुख्यतः परंपरागत स्रोतों में मिलता है।
- पूर्ण चंद को शिकार का विशेष शौक था और वह अपना अधिकांश समय शिकार में व्यतीत करता था।
- वह विशेष रूप से तराई-भाबर क्षेत्र में शिकार करने में रुचि रखता था।
- शिकार के प्रति अत्यधिक रुचि के कारण उसने राजकाज पर अपेक्षाकृत कम ध्यान दिया।
- पूर्ण चंद ने अंततः अपना संपूर्ण राज्य अपने पुत्र को सौंप दिया।
- राज्य का दायित्व पुत्र को सौंपने के बाद पूर्ण चंद धार्मिक जीवन की ओर उन्मुख हो गया।
- उसने स्वयं को माता पूर्णागिरी की सेवा एवं आराधना में समर्पित कर दिया।
- इस प्रकार पूर्ण चंद के जीवन में राजकीय दायित्व से धार्मिक साधना की ओर परिवर्तन दिखाई देता है।
निष्कर्ष
राजा पूर्ण चंद के संबंध में उपलब्ध विवरण उसके शासन की अपेक्षा उसके व्यक्तिगत जीवन और धार्मिक प्रवृत्ति पर अधिक प्रकाश डालते हैं। वह शिकार-प्रेमी शासक के रूप में वर्णित है, जो विशेष रूप से तराई-भाबर क्षेत्र में शिकार करने में समय व्यतीत करता था। शिकार के प्रति उसकी अत्यधिक रुचि के कारण राजकाज में उसका ध्यान कम हो गया। अंततः उसने अपना संपूर्ण राज्य अपने पुत्र को सौंप दिया और स्वयं सांसारिक राजकीय दायित्वों से अलग होकर माता पूर्णागिरी की सेवा एवं आराधना में तल्लीन हो गया। इस प्रकार पूर्ण चंद का जीवन चंद वंश के प्रारंभिक इतिहास में एक ऐसे शासक के रूप में प्रस्तुत होता है, जिसने अपने जीवन के अंतिम चरण में राजसत्ता की अपेक्षा धार्मिक साधना को प्राथमिकता दी।