सीरा शाखा|Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material
परिचय
सीरा शाखा डोटी से संबंधित परवर्ती कात्यूरी शाखाओं में महत्वपूर्ण स्थान रखती थी। सीरा राज्य वर्तमान पिथौरागढ़ क्षेत्र में सोर के उत्तर से काली नदी तक विस्तृत था और इसकी राजधानी दुर्गम सीराकोट थी। यहाँ के शासक रैका उपाधि धारण करते थे तथा मल्लवंशी माने जाते हैं। सीरा के इतिहास के लिए अभिलेख, वंशावलियाँ और राजस्व-बहियाँ महत्वपूर्ण स्रोत हैं।
प्रमुख बिंदु
- सीरा राज्य सोर के उत्तर में काली नदी तक विस्तृत क्षेत्र में स्थित था।
- इसकी राजधानी दुर्गम सीराकोट थी।
- यहाँ के शासक ‘रैका’ उपाधि धारण करते थे और मल्लवंशी माने जाते हैं।
- सीरा शाखा को डोटी के कातियूर राजवंश की शाखा माना जाता है।
- सीरा के मल्ल राजाओं का इतिहास अभिलेखों, वंशावलियों तथा राजस्व-बहियों से ज्ञात होता है।
- एटकिंसन के अनुसार, सीरा के राजा कभी डोटी के रैका राजा तथा कभी डोटी के रैका परिवार की कनिष्ठ शाखा के राजा दिखाई देते हैं।
- एटकिंसन की वंशावली में हरिमल्ल तक 19 राजाओं का उल्लेख मिलता है।
- डॉ. राम सिंह के अनुसार सीरा के 16 राजाओं ने लगभग 1275 से 1581 ई. तक शासन किया।
- प्रो. एम.पी. जोशी डोटी-डंडेलधुरा और सीरा के रैका मल्लों को दो पृथक शाखाएँ नहीं मानते तथा डोटी-सीरा के दस राजाओं का क्रम प्रस्तुत करते हैं।
- डॉ. राम सिंह के अनुसार 1581 ई. में चन्द राजा रुद्रचन्द ने सीरा पर विजय प्राप्त की। हरिमल्ल काली पार डोटी चला गया और सीरा चन्द राज्य का एक गर्खा बन गया।
निष्कर्ष
सीरा शाखा डोटी की कात्यूरी परंपरा की महत्वपूर्ण क्षेत्रीय शाखा थी। इसके शासकों की रैका उपाधि और मल्लवंशी परंपरा इसके डोटी से संबंध को दर्शाती है। सीरा के इतिहास के संबंध में एटकिंसन, डॉ. राम सिंह और प्रो. एम.पी. जोशी के मतों में कुछ अंतर है, जिससे इसके वंशक्रम की जटिलता स्पष्ट होती है। 1581 ई. में रुद्रचन्द की विजय सीरा की स्वतंत्र राजनीतिक सत्ता के अंत की निर्णायक घटना बनी।