डोटी शाखा |Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material
परिचय
डोटी शाखा परवर्ती कात्यूरी वंश की सबसे शक्तिशाली शाखाओं में से एक थी। इसका विस्तार काली नदी के पश्चिमी भाग से वर्तमान पश्चिमी नेपाल तक माना जाता है। डोटी में स्थापित कात्यूरी शासक आगे चलकर ‘महाराजा रैका’ की उपाधि के लिए प्रसिद्ध हुए। यह शाखा कात्यूरी वंश की मल्ल परंपरा से संबंधित मानी जाती है और आगे चलकर डोटी-सीरा क्षेत्र में एक प्रभावशाली राजनीतिक शक्ति के रूप में उभरी।
प्रमुख बिंदु
- डोटी राज्य की स्थापना लगभग 1276 ई. के आसपास मानी जाती है।
- परंपरा के अनुसार डोटी राज्य की स्थापना अभयपाल के अनुज निरंजनदेव (निरंजनमल्लदेव) ने की थी।
- डोटी का क्षेत्र काली नदी के पश्चिमी भाग से लेकर वर्तमान पश्चिमी नेपाल तक विस्तृत था।
- डोटी के कात्यूरी शासक ‘महाराजा रैका’ की उपाधि धारण करते थे।
- इन शासकों को कातियूर/कत्यूरी वंश की मल्ल शाखा से संबंधित माना जाता है।
- डोटी की शाखा ने आगे चलकर कुमाऊँ और पश्चिमी नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में अपना राजनीतिक प्रभाव बढ़ाया।
- परवर्ती कात्यूरी शाखाओं में डोटी-सीरा के रैका राजा सबसे शक्तिशाली माने जाते हैं।
निष्कर्ष
डोटी शाखा परवर्ती कात्यूरी वंश की सबसे प्रभावशाली शाखाओं में से थी। निरंजनदेव से इसकी स्थापना की परंपरा जुड़ी है और इसके शासक महाराजा रैका की उपाधि से प्रसिद्ध हुए। इस शाखा ने पश्चिमी नेपाल में कात्यूरी राजनीतिक परंपरा को लंबे समय तक बनाए रखा तथा आगे चलकर सीरा के साथ मिलकर एक शक्तिशाली क्षेत्रीय सत्ता का निर्माण किया। इसलिए परवर्ती कात्यूरी इतिहास में डोटी शाखा का विशेष राजनीतिक महत्व है।