कुणिन्दों का कर्तृपुर राज्य|Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material
परिचय
कर्तृपुर राज्य उत्तराखंड के प्राचीन इतिहास में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक सत्ता के रूप में वर्णित है। इसका विस्तार वर्तमान उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश तथा रोहिलखंड के उत्तरी भाग तक माना जाता है। साहित्यिक एवं अभिलेखीय स्रोतों से कर्तृपुर के अस्तित्व की जानकारी मिलती है। इसकी पहचान को लेकर इतिहासकारों में मतभेद हैं; अनेक विद्वान इसके शकपति/खसाधिपति शासकों को कुणिन्दों से संबंधित मानते हैं, जबकि कुछ विद्वान इन्हें कुषाणों से जोड़ते हैं। कर्तृपुर की राजधानी कार्तिकेयपुर मानी जाती है।
कर्तृपुर राज्य के प्रमुख स्रोत
- राजशेखर की ‘काव्यमीमांसा’ में कर्तृपुर क्षेत्र में एक शक्तिशाली खसाधिपति के शासन का उल्लेख मिलता है।
- विशाखदत्त के ‘देवीचंद्रगुप्तम्’ तथा बाणभट्ट के ‘हर्षचरित’ में कर्तृपुर के शासक को शकपति कहा गया है।
- समुद्रगुप्त की प्रयाग प्रशस्ति में कर्तृपुर को गुप्त साम्राज्य की उत्तरी सीमा से संबंधित एक राज्य के रूप में माना जाता है।
कुणिन्दों का कर्तृपुर राज्य महत्वपूर्ण तथ्य
- कर्तृपुर राज्य का क्षेत्र वर्तमान उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश तथा रोहिलखंड के उत्तरी भाग तक विस्तृत माना जाता है।
- यह गुप्त साम्राज्य की उत्तरी सीमा पर स्थित महत्वपूर्ण राज्य था।
- अधिकांश इतिहासकारों के अनुसार कर्तृपुर के शकपति या खसाधिपति शासक संभवतः कुणिन्दों से संबंधित थे।
- कर्तृपुर की राजधानी कार्तिकेयपुर मानी जाती है।
- राखलदास बनर्जी आदि कुछ विद्वानों ने कर्तृपुर के शकपति की पहचान कुषाण वंशीय शासक से की है।
- स्कन्दगुप्त के काल में हूणों के आक्रमण का उल्लेख मिलता है तथा माना जाता है कि कर्तृपुर क्षेत्र भी हूण आक्रमणों से प्रभावित हुआ।
- राहुल सांकृत्यायन के अनुसार हूण शासक तोरमाण और मिहिरकुल के अधीन हिमालय के कुछ क्षेत्रों पर भी उनका प्रभाव रहा था।
- एक मत के अनुसार बाद में नागवंशीय शासकों ने कर्तृपुर के कुणिन्दों को पराजित कर उनकी सत्ता समाप्त कर दी।
- कर्तृपुर का प्रथम युद्ध रामगुप्त और कर्तृपुर के शक/खस शासक के बीच बताया जाता है। इसमें रामगुप्त की पराजय हुई तथा विजेता शासक ने उसकी पत्नी ध्रुवदेवी की मांग की।
- कर्तृपुर का द्वितीय युद्ध चंद्रगुप्त द्वितीय और कर्तृपुर के शक/खस शासक के बीच हुआ, जिसमें कर्तृपुर का शासक वीरगति को प्राप्त हुआ।
- कर्तृपुर का इतिहास उत्तराखंड में कुणिन्दों से लेकर गुप्तों और हूणों तक सत्ता-परिवर्तन की प्रक्रिया को समझने में महत्वपूर्ण है
निष्कर्ष
कर्तृपुर राज्य प्राचीन उत्तराखंड के राजनीतिक इतिहास की एक महत्वपूर्ण कड़ी था। इसके भौगोलिक विस्तार, कार्तिकेयपुर राजधानी तथा शकपति-खसाधिपति शासकों के उल्लेख से इसकी राजनीतिक महत्ता स्पष्ट होती है। यद्यपि इसके शासकों की पहचान को लेकर कुणिन्द, शक तथा कुषाण संबंधी विभिन्न मत हैं, फिर भी यह क्षेत्र गुप्त साम्राज्य की उत्तरी सीमा पर एक महत्वपूर्ण शक्ति रहा। बाद में गुप्त, हूण तथा अन्य स्थानीय शक्तियों के प्रभाव से कर्तृपुर की राजनीतिक स्थिति में परिवर्तन आया और इसकी स्वतंत्र सत्ता धीरे-धीरे समाप्त हो गई।