उत्तराखंड के संदर्भ में कुलूत राजवंश|Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material
परिचय
कुलूत राजवंश प्राचीन हिमालयी क्षेत्र की महत्वपूर्ण राजनीतिक शक्तियों में से एक था। इसका मुख्य क्षेत्र वर्तमान हिमाचल प्रदेश की कुल्लू घाटी, विशेषतः व्यास एवं पार्वती नदी की घाटियों में माना जाता है। हिन्द-यूनानी (यवन) शक्ति के अवसान के बाद यहाँ कुलूतों ने स्वतंत्र सत्ता स्थापित की। साहित्यिक एवं मुद्राशास्त्रीय साक्ष्यों से इस वंश की राजनीतिक स्थिति तथा सांस्कृतिक संपर्कों की जानकारी मिलती है। यद्यपि कुलूत राज्य का मुख्य क्षेत्र वर्तमान उत्तराखंड से पश्चिम में था, फिर भी इसका इतिहास उत्तराखंड के प्राचीन हिमालयी राज्यों के अध्ययन से निकटता से जुड़ा है।
कुलूत राजवंश — प्रमुख बिंदु
- हिन्द-यूनानी (यवन) शक्ति के अवसान के उपरांत वर्तमान उत्तराखंड के पश्चिम में काँगड़ा जनपद की कुल्लू घाटी, अर्थात् व्यास-पार्वती घाटी में कुलूत राजवंश का स्वतंत्र शासन स्थापित था।
- कुलूत वंश की जानकारी बृहत्संहिता एवं मुद्राराक्षस जैसे साहित्यिक ग्रंथों से भी प्राप्त होती है।
- कुलूत नरेश वीरयश की एक वृत्ताकार रजत मुद्रा कनिंघम को औदुम्बरों की मुद्रा के साथ प्राप्त हुई थी। इसके पुरोभाग पर ब्राह्मी लिपि में संस्कृत मुद्रालेख “राज्ञः कुलूतस्य वीरयशस्य” अंकित है।
- वीरयश की दूसरी मुद्रा मार्शल को सिरकप (Taxila) से प्राप्त हुई थी। यह वर्गाकार ताम्र मुद्रा है, जिसका पुरोभाग अस्पष्ट है तथा पृष्ठभाग पर खरोष्ठी लिपि में प्राकृत लेख अंकित है।
- वीरयश की मुद्राएँ कुलूत राज्य के स्वतंत्र राजनीतिक अस्तित्व एवं विकसित मुद्रा-प्रचलन का महत्वपूर्ण प्रमाण हैं।
- कुलूतों के अन्य समकालीन हिमालयी जनपदों, विशेषकर औदुम्बरों, से राजनीतिक अथवा सांस्कृतिक संपर्क रहे होने की संभावना इन मुद्राओं से दिखाई देती है।
- कुलूत क्षेत्र का व्यापारिक महत्व भी था, क्योंकि हिमालयी घाटियों से होकर मैदानी भारत और मध्य एशियाई क्षेत्रों के बीच संपर्क मार्ग गुजरते थे।
- कालांतर में कुलूत जनपद के गुप्त साम्राज्य के अधीन आने की संभावना व्यक्त की जाती है।
- कुलूतों का इतिहास प्राचीन हिमालय में विकसित छोटे स्वतंत्र जनपदों एवं स्थानीय राजसत्ताओं की परंपरा को समझने में महत्वपूर्ण है।
निष्कर्ष
कुलूत राजवंश प्राचीन हिमालय की उन स्थानीय शक्तियों में था, जिसने हिन्द-यूनानी शक्ति के पतन के बाद अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान स्थापित की। वीरयश की रजत एवं ताम्र मुद्राएँ कुलूतों के इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण प्रमाणों में हैं। साहित्यिक स्रोतों तथा मुद्राओं से इनके राजनीतिक अस्तित्व और व्यापक सांस्कृतिक संपर्कों का संकेत मिलता है। यद्यपि कुलूतों का मुख्य क्षेत्र वर्तमान हिमाचल प्रदेश में था, फिर भी पश्चिमी उत्तराखंड से इसकी भौगोलिक निकटता के कारण यह उत्तराखंड के प्राचीन हिमालयी राजनीतिक इतिहास की पृष्ठभूमि समझने में विशेष महत्व रखता है।