ग्वारख्या गुफा (उड्यार) उत्तराखंड की प्रागैतिहासिक शैलचित्र परंपरा का एक महत्वपूर्ण स्थल है। यहाँ प्राप्त शैलचित्र प्राचीन मानव की कलात्मक अभिव्यक्ति, जीवन-गतिविधियों तथा प्रकृति और पशुओं के साथ उसके संबंधों को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। चित्रों में मानव एवं पशु आकृतियों का संयोजन तत्कालीन जीवन के विभिन्न पक्षों को दर्शाता है। रंगों, आकृतियों और चित्रांकन की विशिष्ट शैली के कारण ग्वारख्या गुफा उत्तराखंड की प्रागैतिहासिक कला-विरासत में विशेष महत्त्व रखती है। इसका अध्ययन न केवल प्राचीन चित्रकला, बल्कि उस समय के मानव की सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना को समझने में भी सहायक है।
मुख्य तथ्य एवं विशेषताएं
ग्वारख्या गुफा (उड्यार) को पुरातत्वविदों की नजरों में लाने का श्रेय राकेश भट्ट को जाता है।
इसकी खोज 1993 में की गई।
ग्वारख्या गुफा चमोली के डुग्री गाँव में अलकनंदा नदी के तट पर स्थित है।
ग्वारख्या गुफा से मानव, भेड़, बारहसिंगा के 41 रंगीन चित्र मिले, जिनमें 8 चित्र पशुओं के एवं अन्य 33 मानव आकृतियों के हैं।
ग्वारख्या गुफा के चित्रों का मुख्य विषय पशुओं को हाँका देकर भगाना अथवा घेरना है
तथा मनुष्यों को त्रिशूल आकार में अंकित किया गया है।जबकि बकरीनुमा जानवरो के छाया चित्र काफ़ी प्रकृतिक है।
यहाँ पीले रंग की धारीदार चट्टान पर चित्रों मे गुलाबी वह लाल रंग से चित्र अंकित किया गया है ।
यह लाखु गुफा से ज्यादा चटकदार है।1
चित्रकला की दृष्टि से उत्तराखंड की संभवतः सबसे सुंदर चित्र यही है।
डॉ यशोधर मठपाल के अनुसार गोरखा काल में नेपाली सैनिकों के एक दल ने गांव को लूटकर यहाँ माल छिपाया था तथा अन्य दलों के परिचय हेतु चट्टानों पर चित्रों के रूप में लिखावट की थी, इस लोक विश्वास पर चित्रित शिलापट का नाम ग्वारख्या गुफा (उड्यार) पड़ा परंतु यहां ना तो गुफा जैसी कोई चीज है नहीं खजाने छुपाने का स्थान।
निष्कर्ष
ग्वारख्या गुफा के शैलचित्र उत्तराखंड की प्रागैतिहासिक सांस्कृतिक विरासत के महत्वपूर्ण प्रमाण हैं। इनमें मानव और पशुओं के चित्रण के माध्यम से तत्कालीन मानव के जीवन, गतिविधियों और उसके प्राकृतिक परिवेश से संबंधों की झलक मिलती है। चित्रों की विषय-वस्तु और कलात्मक शैली इसे अन्य शैलचित्र स्थलों से अलग पहचान प्रदान करती है। इसलिए ग्वारख्या गुफा को केवल प्राचीन चित्रों के स्थल के रूप में देखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह मानव की प्रारंभिक कलात्मक चेतना, सामाजिक जीवन और सांस्कृतिक विकास को समझने का महत्वपूर्ण स्रोत है।
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Q1. ग्वारख्या गुफा (उड्यार) को पुरातत्वविदों की नजरों में लाने का श्रेय किसे दिया जाता है?
Explanation:
ग्वारख्या गुफा (उड्यार) को पुरातत्वविदों की नजरों में लाने का श्रेय राकेश भट्ट को दिया जाता है। इसकी खोज 1993 ई. में की गई थी। उत्तराखण्ड के प्रागैतिहासिक शैलचित्रों के अध्ययन में यह स्थल अपने विशिष्ट चित्रांकन और विषय-वस्तु के कारण महत्वपूर्ण है।
Q2. ग्वारख्या गुफा के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—
1. ग्वारख्या गुफा चमोली के डुग्री गाँव में स्थित है।
2. यह अलकनंदा नदी के तट पर स्थित है।
सही उत्तर चुनिए—
Explanation:
ग्वारख्या गुफा चमोली जनपद के डुग्री गाँव में स्थित है और इसका स्थान अलकनंदा नदी के तट से संबंधित है। ये दोनों तथ्य इस शैलचित्र स्थल की भौगोलिक पहचान के लिए महत्वपूर्ण हैं और इसे उत्तराखण्ड के प्रमुख प्रागैतिहासिक चित्रस्थलों में स्थान देते हैं।
Q3. ग्वारख्या गुफा के चित्रों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—
1. यहाँ कुल 41 रंगीन चित्र प्राप्त हुए हैं।
2. इनमें 8 चित्र पशुओं के तथा 33 चित्र मानव आकृतियों के हैं।
सही उत्तर है—
Explanation:
ग्वारख्या गुफा से 41 रंगीन चित्र प्राप्त हुए हैं। इनमें 8 चित्र पशुओं के और 33 चित्र मानव आकृतियों के बताए गए हैं। चित्रों में मानव तथा भेड़ और बारहसिंगा जैसे पशुओं की आकृतियाँ मिलती हैं, जो इस स्थल की विषय-विविधता को दर्शाती हैं।
Q4. ग्वारख्या गुफा के शैलचित्रों का मुख्य विषय निम्नलिखित में से क्या है?
Explanation:
ग्वारख्या गुफा के चित्रों का मुख्य विषय पशुओं को हाँका देकर भगाना अथवा उन्हें घेरना है। यह विषय इस स्थल के शैलचित्रों को समझने में विशेष महत्व रखता है। मानव आकृतियों को भी विशिष्ट शैली में अंकित किया गया है, जो इसकी चित्रकला की अलग पहचान बनाती है।
Q5. ग्वारख्या गुफा में मानव आकृतियों को किस विशिष्ट आकार में अंकित किया गया है?
Explanation:
ग्वारख्या गुफा के शैलचित्रों में मानव आकृतियों को त्रिशूल आकार में अंकित किया गया है। इसके विपरीत बकरीनुमा जानवरों के छाया चित्र अपेक्षाकृत प्राकृतिक दिखाई देते हैं। मानव और पशु आकृतियों की यह शैलीगत भिन्नता ग्वारख्या की चित्रकला की महत्वपूर्ण विशेषता है।
Q6. ग्वारख्या गुफा के शैलचित्रों में रंगों के प्रयोग के संबंध में कौन-सा विकल्प सही है?
Explanation:
ग्वारख्या गुफा में चित्र पीले रंग की धारीदार चट्टान पर बनाए गए हैं। इन चित्रों में गुलाबी और लाल रंग का प्रयोग बताया गया है। रंग और चट्टान की यह विशेषता ग्वारख्या के शैलचित्रों की दृश्य पहचान को विशिष्ट बनाती है।
Q7. लाखु गुफा की तुलना में ग्वारख्या गुफा के चित्रों की कौन-सी विशेषता बताई गई है?
Explanation:
दिए गए तथ्यों के अनुसार ग्वारख्या गुफा के चित्र लाखु गुफा की तुलना में अधिक चटकदार हैं। इसके शैलचित्रों में गुलाबी और लाल रंग का प्रयोग तथा विशिष्ट मानव-पशु आकृतियाँ दिखाई देती हैं। चित्रकला की दृष्टि से इसे उत्तराखण्ड के अत्यंत सुंदर शैलचित्र स्थलों में माना गया है।
Q8. चित्रकला की दृष्टि से ग्वारख्या गुफा के संबंध में कौन-सा कथन दिया गया है?
Explanation:
दिए गए तथ्यों के अनुसार चित्रकला की दृष्टि से ग्वारख्या गुफा के चित्र उत्तराखण्ड में संभवतः सबसे सुंदर माने गए हैं। इसकी चित्रात्मक शैली, रंगों का प्रयोग, मानव आकृतियाँ और प्राकृतिक दिखाई देने वाले पशु-छाया चित्र इसे विशिष्ट बनाते हैं।
Q9. डॉ. यशोधर मठपाल से संबंधित ग्वारख्या गुफा के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
Explanation:
डॉ. यशोधर मठपाल के अनुसार एक लोकविश्वास में गोरखा काल के नेपाली सैनिकों द्वारा गाँव को लूटकर माल छिपाने तथा परिचय के लिए चट्टानों पर चित्र बनाने की बात कही जाती है। इसी लोकमान्यता से शिलापट का नाम ग्वारख्या गुफा पड़ा बताया जाता है।
Q10. ग्वारख्या गुफा के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
Explanation:
ग्वारख्या गुफा से 41 रंगीन चित्र मिले हैं, लेकिन इनमें 8 पशु चित्र और 33 मानव आकृतियाँ हैं। अतः 33 पशु आकृतियों वाला कथन गलत है। दिए गए तथ्य के अनुसार यहाँ वास्तविक गुफा या खजाना छिपाने का स्थान भी नहीं पाया गया है।
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