1886 का भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अधिवेशन
परिचय
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का दूसरा अधिवेशन 1886 ई. में कलकत्ता (वर्तमान कोलकाता) में आयोजित हुआ। इस अधिवेशन की अध्यक्षता प्रसिद्ध राष्ट्रवादी नेता दादाभाई नौरोजी ने की। कांग्रेस के प्रारंभिक अधिवेशनों ने भारत के विभिन्न क्षेत्रों के राजनीतिक कार्यकर्ताओं को एक साझा मंच प्रदान किया। उत्तराखण्ड के कुमाऊँ क्षेत्र के प्रतिनिधियों की भागीदारी भी इसी व्यापक राजनीतिक जागरूकता के विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती है।
प्रमुख तथ्य
- 1886 ई. में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का दूसरा अधिवेशन कलकत्ता में आयोजित हुआ।
- इस अधिवेशन के अध्यक्ष दादाभाई नौरोजी थे।
- कांग्रेस का पहला अधिवेशन 1885 ई. में बंबई (वर्तमान मुंबई) में हुआ था, जिसकी अध्यक्षता डब्ल्यू. सी. बनर्जी ने की थी।
- आपके दिए गए विवरण के अनुसार, कुमाऊँ क्षेत्र के ज्वालादत्त जोशी सहित दो नेताओं ने 1886 के कांग्रेस अधिवेशन में भाग लिया।
- इस भागीदारी को उत्तराखण्ड क्षेत्र के राजनीतिक कार्यकर्ताओं के भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन से प्रारंभिक जुड़ाव के रूप में देखा जाता है।
निष्कर्ष
1886 का कांग्रेस अधिवेशन भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के शुरुआती विकास का महत्वपूर्ण चरण था। दादाभाई नौरोजी की अध्यक्षता में आयोजित इस अधिवेशन ने कांग्रेस के विस्तार और विभिन्न क्षेत्रों के राजनीतिक कार्यकर्ताओं को जोड़ने में भूमिका निभाई। कुमाऊँ क्षेत्र से ज्वालादत्त जोशी सहित प्रतिनिधियों की भागीदारी उत्तराखण्ड में राष्ट्रीय राजनीतिक चेतना के विकास के संदर्भ में उल्लेखनीय है। हालांकि, इन प्रतिनिधियों के नामों और उनकी भागीदारी की पुष्टि के लिए ऐतिहासिक स्रोतों का मिलान करना उचित होगा।