पंवार कालीन मुद्राये

पंवार कालीन मुद्रा-प्रचलनदसवीं शताब्दी ईस्वी के आसपास कार्तिकेयपुर राजवंश के शासकों की निर्बलता का लाभ उठाकर चाँदपुरगढ़ के परमार (पंवार) स्वतंत्र हो गये।प्रतीत होता है कि लक्ष्मणदेव से कुछ पीढ़ी पूर्व ही पंवार शासकों ने अपनी मुद्राएँ प्रचलित कर दी थीं। तथापि, अन्य भारतीय राज्यों की भाँति यहाँ भी द्रव्य-विनिमय (Barter) की प्रथा प्रधान थी और मुद्रा का प्रचलन अल्प था।

Similar Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *