प्रताप शाह भाग -2 |Tehri Risayat of Garhwal|Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material

7. प्रतापनगर की स्थापना एवं राजधानी का स्थानांतरण

  • 1877 ई. में प्रताप शाह ने प्रतापनगर की स्थापना की।
  • प्रतापनगर का पुराना नाम ढागधार था।
  • यह जलकूर नदी के तट पर स्थित था।
  • प्रताप शाह ने प्रतापनगर को अपनी ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया।
  • प्रतापनगर की स्थापना के बाद उन्होंने राजधानी को टिहरी से प्रतापनगर स्थानांतरित किया।
  • इस प्रकार प्रताप शाह टिहरी राजवंश के प्रथम राजा थे जिन्होंने राजधानी को स्थानांतरित किया।
  • वे टिहरी रियासत के अपने नाम पर नगर स्थापित करने वाले प्रथम राजा भी माने जाते हैं।

8. वन व्यवस्था

  • प्रताप शाह ने वनों की सुरक्षा के लिए वन संबंधी नियम बनाए।
  • 1885 ई. में वन नीति लागू किए जाने का उल्लेख मिलता है।
  • इसका उद्देश्य राज्य के वनों के संरक्षण एवं उनके व्यवस्थित उपयोग को बढ़ावा देना था।

9. प्रताप प्रिंटिंग प्रेस

  • प्रताप शाह ने टिहरी में प्रताप प्रिंटिंग प्रेस स्थापित कराया।
  • इसे टिहरी रियासत का प्रथम प्रेस माना जाता है।
  • इस प्रेस के माध्यम से राज्य में मुद्रण एवं प्रकाशन की गतिविधियों को बढ़ावा मिला।

10. साहित्य एवं दरबार

  • प्रताप शाह के दरबारी कवि देवराज थे।
  • देवराज की प्रसिद्ध रचना ‘गढ़वाल राज्ञा वंशावली’ है।
  • प्रताप शाह के दरबार में साहित्य एवं विद्या को संरक्षण प्राप्त था।

11. बासर ढांडक आंदोलन, 1882

  • प्रताप शाह के शासनकाल में 1882 ई. में बासर ढांडक (विद्रोह/आंदोलन) हुआ।
  • इसका नेतृत्व लछमू कठेत ने किया।
  • लछमू कठेत टिहरी राज्य के रवाई परगने के प्रशासक थे।
  • उस समय ‘पाला बिसाऊ’ नामक प्रथा प्रजा पर लगाए जाने वाले कर से संबंधित थी।
  • लछमू कठेत ने पाला बिसाऊ प्रथा के विरोध में विद्रोह किया।
  • यह आंदोलन प्रताप शाह के शासनकाल में प्रजा एवं राज्य-व्यवस्था के बीच उत्पन्न तनाव का महत्वपूर्ण उदाहरण है।

12. लछमू कठेत

  • 1. लछमू कठेत टिहरी रियासत में रवाई परगने के प्रशासक थे।
  • उन्हें ‘रायबहादुर’ की पदवी से सम्मानित होने वाले प्रथम गढ़वाली के रूप में भी उल्लेखित किया जाता है।
  • प्रताप शाह के समय पाला बिसाऊ प्रथा के विरोध में उन्होंने विद्रोह किया।
  • 1882 ई. का बासर ढांडक आंदोलन उनके नेतृत्व में हुआ।

13. महारानी गुलेरिया

  • महारानी गुलेरिया प्रताप शाह की पत्नी थीं।
  • उनका मूल नाम कुन्दनदेई था।
  • उनका जन्म मंडी रियासत (हिमाचल प्रदेश) में हुआ था।
  • प्रताप शाह की मृत्यु के बाद टिहरी रियासत में लगभग एक वर्ष तक शोक मनाया गया।
  • महारानी गुलेरिया ने कौंसिल ऑफ रीजेंसी की सहायता से राज्य का शासन चलाया।

14. प्रताप शाह के उत्तराधिकारी

  • प्रताप शाह के तीन प्रमुख पुत्र थे—1. कीर्तिशाह2. कुँवर विचित्रशाह3 . कुँवर सुरेंद्र शाह

निष्कर्ष

राजा प्रताप शाह का शासनकाल टिहरी रियासत में प्रशासनिक एवं संस्थागत विकास के लिए महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने राजस्व व्यवस्था को व्यवस्थित करने के लिए 22 पट्टियों और कारदारों की व्यवस्था, शांति-व्यवस्था के लिए चार प्रशासनिक क्षेत्रों तथा पुलिस व्यवस्था का विकास किया। शिक्षा के क्षेत्र में अंग्रेजी शिक्षा की शुरुआत, विद्यालयों एवं बोर्डिंग स्कूल की स्थापना उनके प्रमुख कार्यों में रही। स्वास्थ्य के क्षेत्र में अस्पताल और खैराती दवाखाने की स्थापना, जबकि परिवहन क्षेत्र में टिहरी-मसूरी एवं टिहरी-श्रीनगर मार्गों का निर्माण उल्लेखनीय रहा। उन्होंने 1877 ई. में प्रतापनगर की स्थापना कर उसे ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाया। सामाजिक स्तर पर बेगार, बिशाह, पाला जैसी प्रथाओं में सुधार तथा दासों की बिक्री पर रोक के प्रयास किए गए। साहित्य, मुद्रण और वन संरक्षण को भी उनके शासन में प्रोत्साहन मिला। इस प्रकार प्रताप शाह का काल टिहरी रियासत में परंपरागत शासन से अधिक संगठित प्रशासन की ओर बढ़ने का महत्वपूर्ण चरण था।

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