राजा अनंतपाल द्वितीय |Parmar/Panwar Dynasty|Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material
परिचय
पंवार/परमार राजवंश के इतिहास में राजा अनंतपाल द्वितीय का महत्व मुख्यतः उनसे संबंधित अभिलेखीय प्रमाण के कारण है। उन्हें परमार राजवंश का 29वाँ शासक माना जाता है। उनके शासनकाल से संबंधित सबसे महत्वपूर्ण प्रमाण धारशिल शिलालेख है, जो रुद्रप्रयाग जनपद के ऊखीमठ क्षेत्र में प्राप्त हुआ। यह शिलालेख प्रारंभिक परमार शासकों के इतिहास, उनके शासनकाल तथा गढ़वाल की तत्कालीन राजनीतिक स्थिति के अध्ययन में महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है।
प्रमुख बिंदु
- अनंतपाल द्वितीय को पंवार/परमार राजवंश का 29वाँ राजा माना जाता है।
- अनंतपाल द्वितीय का राज्यारोहण 1333 ई. में हुआ था।
- उनसे संबंधित महत्वपूर्ण धारशिल शिलालेख वर्ष 1994 ई. में प्राप्त हुआ था।
- धारशिल शिलालेख का संबंध 29वें परमार शासक अनंतपाल द्वितीय से माना जाता है।
- यह शिलालेख रुद्रप्रयाग जनपद के ऊखीमठ क्षेत्र में मंदाकिनी नदी की घाटी के निकट स्थित धारशिल गाँव से प्राप्त हुआ है।
- धारशिल शिलालेख अनंतपाल द्वितीय के शासनकाल और प्रारंभिक पंवार/परमार इतिहास के अध्ययन की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण अभिलेखीय स्रोत है।
निष्कर्ष
राजा अनंतपाल द्वितीय को पंवार/परमार राजवंश का 29वाँ शासक माना जाता है और उनका राज्यारोहण 1333 ई. में हुआ बताया जाता है। उनके संबंध में सबसे महत्वपूर्ण प्रमाण धारशिल शिलालेख है, जो 1994 ई. में रुद्रप्रयाग जनपद के ऊखीमठ क्षेत्र के धारशिल गाँव, मंदाकिनी नदी घाटी के निकट प्राप्त हुआ। यह अभिलेख प्रारंभिक परमार शासकों के इतिहास के पुनर्निर्माण में विशेष महत्व रखता है। इस प्रकार अनंतपाल द्वितीय का शासनकाल केवल वंशावली की दृष्टि से ही नहीं, बल्कि अभिलेखीय प्रमाणों की दृष्टि से भी गढ़वाल के पंवार/परमार इतिहास का महत्वपूर्ण चरण है।