लक्ष्मी चंद भाग -2
- नरसिंह बाड़ी, पांडे खाला, कबीना और लक्ष्मीश्वर आदि बागों को लक्ष्मी चंद के समय से संबंधित माना जाता है।
- उन्होंने अनेक मंदिरों का निर्माण तथा पुराने मंदिरों का जीर्णोद्धार करवाया।
- 1602 ई. में बागेश्वर के बाघनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार लक्ष्मी चंद द्वारा करवाया गया। इसके शिवलिंग में तांबे की नई शक्ति लगवाने का भी उल्लेख मिलता है।
- अल्मोड़ा में लक्ष्मीश्वर महादेव मंदिर का निर्माण भी लक्ष्मी चंद से संबंधित है।
- 1599 ई. में लक्ष्मी चंद ने रैका की राजस्व व्यवस्था को अपनाया, जिससे चंद राजस्व व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित करने में सहायता मिली।
- जहाँगीरनामा में लक्ष्मी चंद को पहाड़ी राजाओं में सबसे धनी राजा बताया गया है।
- लक्ष्मी चंद द्वारा एक टम्टा को ‘अधाली’ अथवा आठ नाली भूमि दान किए जाने का उल्लेख मिलता है।
- उनके समय में करों के दबाव का भी उल्लेख मिलता है। परंपरा के अनुसार, करों के भय से लोग छतों पर शाक-सब्जियाँ उगाने लगे थे।
- लक्ष्मी चंद के समय राजा के राजसी वस्त्र, जूते तथा निजी हथियार रखने वाले आवास को ‘सेज्वाल’ कहा जाता था और उसकी सुरक्षा के लिए अलग अधिकारी नियुक्त किया जाता था।
निष्कर्ष
राजा लक्ष्मी चंद का शासन चंद वंश के इतिहास में सैन्य संघर्ष, मुगल कूटनीति, प्रशासनिक संगठन और सांस्कृतिक निर्माण की दृष्टि से महत्वपूर्ण था। गढ़वाल के राजा मानशाह के विरुद्ध आठ अभियानों में प्रारंभिक असफलताओं के बावजूद उन्होंने संघर्ष जारी रखा और अंतिम अभियान में चंद सेना को आंशिक सफलता मिली। मुगल सम्राट जहाँगीर से उनकी भेंट और उसके साथ बनाए गए संबंधों ने चंद राज्य को तराई-भावर के क्षेत्र में अपनी स्थिति सुरक्षित रखने में सहायता की। प्रशासन के क्षेत्र में भूमि-बंदोबस्त, कर निर्धारण, न्यायालयों तथा राज्य कर्मचारियों की श्रेणियों को व्यवस्थित किया गया। दारमा घाटी की व्यवस्था, सीमा-सूचक पत्थरों तथा बंदोबस्ती कार्यालय की स्थापना भी महत्वपूर्ण थी। धार्मिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र में बाघनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार, लक्ष्मीश्वर मंदिर तथा अनेक बाग-बगीचों का निर्माण उनके योगदान को दर्शाता है। इस प्रकार लक्ष्मी चंद एक ऐसे शासक थे जिनके शासन में चंद राज्य की प्रशासनिक एवं सांस्कृतिक संरचना को महत्वपूर्ण रूप से विकसित किया गया।