क्रांतिकारी आंदोलन में उत्तराखंड की भूमिका

परिचय

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में उत्तराखंड के क्रांतिकारियों ने भी महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। जहाँ एक ओर उत्तराखंड में जनआंदोलनों और सत्याग्रहों के माध्यम से ब्रिटिश शासन का विरोध किया गया, वहीं दूसरी ओर कुछ क्रांतिकारियों ने सशस्त्र संघर्ष का मार्ग अपनाया। भवानी सिंह रावत, इन्द्र सिंह गढ़वाली और बच्चूलाल भट्ट जैसे क्रांतिकारी विभिन्न क्रांतिकारी संगठनों से जुड़े रहे। उन्होंने स्वतंत्रता प्राप्ति के उद्देश्य से गुप्त गतिविधियों, बम कांडों और अन्य क्रांतिकारी कार्रवाइयों में भाग लिया तथा कठोर कारावास की सजाएँ भोगीं।

प्रमुख तथ्य

  • क्रांतिकारी आंदोलन में भाग लेने वाले भवानी सिंह रावत, इन्द्र सिंह गढ़वाली एवं बच्चूलाल भट्ट का संबंध गढ़वाल क्षेत्र से था।
  • भवानी सिंह रावत, चन्द्रशेखर आजाद द्वारा गठित हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) के सदस्य थे। इस संगठन का गठन 1928 ई. में हुआ था।
  • वर्ष 1929 ई. में चन्द्रशेखर आजाद ने अपने साथियों यशपाल एवं भवानी सिंह रावत के साथ दिल्ली के निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन के निकट वायसराय के सैलून पर बम फेंका था। यह घटना वायसराय बम कांड के नाम से जानी जाती है।
  • चन्द्रशेखर आजाद एवं भवानी सिंह रावत सहित अन्य साथियों ने दिल्ली के चाँदनी चौक स्थित गाडोदिया स्टोर में डकैती डालने के बाद हथियार खरीदे। हथियार चलाने का प्रशिक्षण लेने के लिए वे वर्ष 1930 ई. में गढ़वाल आए थे।
  • इन्द्र सिंह गढ़वाली का जन्म टिहरी रियासत में हुआ था। नौजवान भारत सभा ने उन्हें एक क्रांतिकारी टुकड़ी का संचालक बनाकर दक्षिण भारत भेजा। वहाँ मद्रास में वे प्रेम प्रकाश मुनि नाम से साधु के भेष में रहने लगे।
  • इन्द्र सिंह गढ़वाली हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के सदस्य थे। उन्होंने वर्ष 1933 ई. के मद्रास बम कांड में भाग लिया था। पकड़े जाने के बाद उन्हें 20 वर्ष के काले पानी की सजा सुनाई गई थी।
  • क्रांतिकारी बच्चूलाल भट्ट का जन्म लैंसडाउन क्षेत्र में हुआ था। शम्भूनाथ आजाद ने उन्हें नौजवान भारत सभा का सदस्य बनाया था।
  • बच्चूलाल भट्ट ने वर्ष 1933 ई. के ऊँटी बैंक डकैती कांड में भाग लिया था। इस मामले में उन्हें 18 वर्ष की सजा सुनाई गई थी।

निष्कर्ष

उत्तराखंड के क्रांतिकारियों ने स्वतंत्रता संग्राम में साहस और बलिदान की उल्लेखनीय मिसाल प्रस्तुत की। भवानी सिंह रावत, इन्द्र सिंह गढ़वाली और बच्चूलाल भट्ट जैसे सेनानियों ने क्रांतिकारी संगठनों से जुड़कर ब्रिटिश शासन को चुनौती दी। कठोर दंड और कारावास के बावजूद स्वतंत्रता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के इतिहास में उत्तराखंड के योगदान को रेखांकित करती है।

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