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  • Uttrakhand History

    पाली-द्वाराहाट-लखनपुर शाखा|Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material

    ByCompetition Junction September 9, 2026September 24, 2026

    परिचय परवर्ती कात्यूरी काल में पाली-द्वाराहाट-लखनपुर शाखा कुमाऊँ की महत्वपूर्ण क्षेत्रीय शाखाओं में से एक थी। इस शाखा का प्रभाव मुख्यतः रामगंगा नदी के तटवर्ती क्षेत्रों में रहा। द्वाराहाट और लखनपुर इसके प्रमुख राजनीतिक केंद्र माने जाते हैं। इस शाखा के शासकों की जानकारी मुख्यतः अभिलेखीय स्रोतों से प्राप्त होती है। अभिलेखों में प्राप्त शासकों…

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  • Uttrakhand History

    बैजनाथ के परवर्ती कात्यूरी राजा ब्रह्मदेव / वीरदेव |Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material

    ByCompetition Junction September 9, 2026September 24, 2026

    परिचय ब्रह्मदेव, जिसे लोकगाथाओं में वीरदेव, वीरसिंह या बिरमदेव के नाम से भी जाना जाता है, बैजनाथ की परवर्ती कात्यूरी शाखा के अंतिम चरण का महत्वपूर्ण शासक माना जाता है। राजावलियों में धामदेव के बाद ब्रह्मदेव का उल्लेख मिलता है, जबकि पाली-पछाऊँ वंशावली में उसके संबंध में अलग वंशक्रम प्रस्तुत किया गया है। उसे सामान्यतः…

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  • Uttrakhand History

    बैजनाथ के परवर्ती कात्यूरी राजा धामदेव / दुलाशाही / धामदेव दुलाशाही / धामशाही |Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material

    ByCompetition Junction September 9, 2026September 24, 2026

    परिचय धामदेव बैजनाथ की परवर्ती कात्यूरी शाखा का एक महत्वपूर्ण शासक माना जाता है। विभिन्न वंशावलियों और लोकगाथाओं में उसका उल्लेख अलग-अलग नामों से मिलता है। पाली-पछाऊँ की वंशावली के अनुसार वह जियारानी (मौला देवी) से उत्पन्न प्रीतमदेव का उत्तराधिकारी था। उसके शासनकाल की प्रमुख उपलब्धि डोटी विजय मानी जाती है, जिसके बाद डोटी को…

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    बैजनाथ के परवर्ती कात्यूरी राजा :राजा प्रीतमदेव (पिथौराशाही, पृथ्वीपाल, पृथ्वीशाही)|Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material

    ByCompetition Junction September 9, 2026September 24, 2026

    परिचय प्रीतमदेव बैजनाथ की रणचूलीहाट स्थित मूल कात्यूरी शाखा के प्रमुख एवं अंतिम शक्तिशाली शासकों में माना जाता है। विभिन्न राजावलियों और लोकगाथाओं में उसके नाम के अलग-अलग रूप मिलते हैं, जिससे उसकी लोकप्रियता और ऐतिहासिक महत्त्व स्पष्ट होता है। उसके शासनकाल की सबसे प्रसिद्ध घटना चित्रशिला (रानीबाग) का युद्ध मानी जाती है, जिसमें उसने…

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  • Uttrakhand History

    परवर्ती कात्यूरी (प्रायः 1279–प्रायः 1520 ई.) |Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material

    ByCompetition Junction September 9, 2026September 24, 2026

    परिचय तेरहवीं शताब्दी के अंतिम चरण में बैजनाथ के रणचूलीहाट में स्थापित मूल कातियूर सत्ता का क्रमशः विखंडन हुआ। इसके परिणामस्वरूप कातियूर राजवंश की अनेक शाखाएँ कुमाऊँ तथा वर्तमान पश्चिमी नेपाल के विभिन्न क्षेत्रों में स्थापित हो गईं। यद्यपि इन शाखाओं में राजनीतिक रूप से एकता नहीं रही, फिर भी वे अपने को कातियूर परंपरा…

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    अशांतिदेव (लगभग 1040–1050 ई.) |Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material

    ByCompetition Junction September 9, 2026September 24, 2026

    परिचय अशांतिदेव को बैजनाथ अथवा कत्यूर घाटी में स्थापित कातियूर (कत्यूरी) वंश का प्रमुख संस्थापक माना जाता है। उसके संबंध में जानकारी मुख्यतः पाली-पछाऊ की वंशावली, नारसिंहजाप हस्तपोती, गुरु पादुका की पांडुलिपि तथा कुमाऊँ की लोककथाओं से प्राप्त होती है। परंपराओं के अनुसार अशांतिदेव नाथपंथी साधु नारसिंह जोगी से प्रभावित था और उसके परामर्श से…

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  • Uttrakhand History

    बैजनाथ का कत्यूरी/कुमाऊँ का कातियूर राजवंश : जानकारी के स्रोत एवं संस्थापक |Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material

    ByCompetition Junction September 9, 2026September 24, 2026

    परिचय बैजनाथ के कत्यूरी अथवा कुमाऊँ के कातियूर राजवंश के इतिहास के पुनर्निर्माण में अभिलेखीय, पुरातात्विक तथा लोक-साहित्यिक स्रोतों का महत्वपूर्ण योगदान है। इस वंश के इतिहास की जानकारी मुख्यतः मूर्ति-लेखों, मंदिरों से प्राप्त अभिलेखों तथा जागर-गाथाओं से मिलती है। इन स्रोतों के आधार पर कत्यूरी शासकों के नाम, धार्मिक मान्यताओं, मंदिर निर्माण तथा वंश…

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  • Uttrakhand History

    कत्यूरी वंश की राजधानी एवं राजधानी परिवर्तन|Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material

    ByCompetition Junction September 9, 2026September 24, 2026

    परिचय कत्यूरी वंश उत्तराखंड के प्राचीन-मध्यकालीन इतिहास का एक महत्वपूर्ण राजवंश था। इस वंश की प्रारम्भिक राजधानी कार्तिकेयपुर थी, जिसे वर्तमान जोशीमठ के आसपास स्थित माना जाता है। कालांतर में कत्यूरी सत्ता का केंद्र कार्तिकेयपुर से हटकर बैजनाथ की सरयू घाटी में स्थापित हुआ। राजधानी परिवर्तन के समय और कारणों को लेकर इतिहासकारों में मतभेद…

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    सुभिक्षराज|Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material

    ByCompetition Junction September 9, 2026September 23, 2026

    परिचय पदमदेव के पश्चात उसका पुत्र सुभिक्षराज देव कार्तिकेयपुर राज्य की राजगद्दी पर बैठा। वह तृतीय परिवार अर्थात् सलोणादित्य वंश का अंतिम शासक तथा कार्तिकेयपुर राजवंश का भी अंतिम शासक माना जाता है। सुभिक्षराज एक दानी एवं धार्मिक शासक था। उसने राज्य की राजधानी कार्तिकेयपुर से हटाकर सुभिक्षपुर में स्थापित की। धार्मिक दृष्टि से वह…

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  • Uttrakhand History

    पदमदेव|Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material

    ByCompetition Junction September 9, 2026September 23, 2026

    परिचय देशटदेव के पश्चात उसका पुत्र पदमदेव कार्तिकेयपुर राज्य की राजगद्दी पर बैठा। वह तृतीय कत्यूरी परिवार के महत्वपूर्ण शासकों में माना जाता है। उसके शासनकाल की जानकारी मुख्यतः पाण्डुकेश्वर से प्राप्त ताम्र अभिलेख से मिलती है। पदमदेव ने लंबे समय तक शासन किया और धार्मिक संस्थाओं को पर्याप्त संरक्षण प्रदान किया। वह शक्तिशाली, शैव…

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