कत्यूरी कालीन सैन्य प्रशासन |Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material

परिचय

कत्यूरी राज्य के दीर्घकालीन राजनीतिक प्रभुत्व में उसकी सैन्य शक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका रही होगी। उत्तराखंड की पर्वतीय भौगोलिक परिस्थितियों में राज्य की सीमाओं, प्रमुख मार्गों तथा महत्वपूर्ण प्रवेश द्वारों पर नियंत्रण बनाए रखना प्रशासन की बड़ी आवश्यकता थी। कत्यूरी सैन्य व्यवस्था में विभिन्न प्रकार की सेनाओं तथा उनके संचालन के लिए विशिष्ट अधिकारियों का उल्लेख मिलता है। इसके साथ ही सीमाओं, पर्वतीय प्रवेश मार्गों एवं नदी-घाटों की सुरक्षा के लिए भी अलग-अलग अधिकारियों की व्यवस्था दिखाई देती है। इससे कत्यूरी काल में सैन्य संगठन के साथ क्षेत्रीय एवं सीमा-सुरक्षा की विशेष व्यवस्था का पता चलता है।

प्रमुख बिंदु

  • कत्यूरी वंश ने उत्तराखंड में दीर्घ अवधि तक शासन किया। इतने लंबे समय तक राज्य की राजनीतिक सत्ता बनाए रखने में सैन्य शक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
  • कत्यूरी सेना को चार प्रमुख अंगों में विभाजित किया गया था— पदातिक, अश्वारोही, गजारोही एवं ऊष्ट्रारोही। यह सैन्य संगठन विभिन्न प्रकार की युद्ध आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम था।
  • पदातिक सेना में पैदल सैनिक शामिल होते थे और इसका नायक गौल्मिक कहलाता था।
  • अश्वारोही सेना का अधिकारी अश्वबलाधिकृत, गजारोही सेना का अधिकारी हस्तिबलाधिकृत तथा ऊष्ट्रारोही सेना का अधिकारी ऊष्ट्रबलाधिकृत कहलाता था।
  • तीनों आरोही सेनाओं के संयुक्त संचालन के लिए हस्त्यश्वोष्ट्रबलाधिकृत नामक अधिकारी का उल्लेख मिलता है। इससे सैन्य व्यवस्था में विभिन्न सैन्य अंगों के बीच समन्वय का संकेत मिलता है।
  • सेना के चारों अंगों के प्रधान के रूप में महासामन्त का उल्लेख मिलता है। सैन्य व्यवस्था का सर्वोच्च संचालन राजा के अधीन था।
  • कत्यूरी सैन्य संगठन का उद्देश्य केवल युद्ध करना ही नहीं, बल्कि राज्य की सीमाओं, महत्वपूर्ण क्षेत्रों एवं रणनीतिक मार्गों पर नियंत्रण बनाए रखना भी था।
  • राज्य की बाहरी सुरक्षा के लिए प्रान्तपाल जैसे अधिकारी नियुक्त थे, जो राज्य की सीमाओं की सुरक्षा एवं निगरानी से संबंधित कार्य करते थे।
  • घट्टपाल पर्वतीय प्रवेश द्वारों एवं महत्वपूर्ण पहाड़ी मार्गों की सुरक्षा करता था। उत्तराखंड जैसे पर्वतीय क्षेत्र में इन प्रवेश मार्गों का सैन्य एवं रणनीतिक महत्व अत्यधिक था।
  • वर्मपाल सीमांत क्षेत्रों एवं मार्गों पर आवागमन की निगरानी करता था। इस प्रकार सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा एवं नियंत्रण बनाए रखने में इसकी भूमिका महत्वपूर्ण थी।
  • नदी-घाटों पर भी प्रशासनिक एवं सुरक्षा व्यवस्था का प्रबंध था। तरपति नामक अधिकारी आवागमन की सुविधा तथा अवांछित व्यक्तियों की गतिविधियों पर निगरानी से संबंधित था।
  • पर्वतीय मार्गों, दर्रों, सीमाओं एवं नदी-घाटों पर अलग-अलग अधिकारियों की व्यवस्था से स्पष्ट होता है कि कत्यूरी सैन्य व्यवस्था में स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों को विशेष महत्व दिया गया था।
  • इस प्रकार कत्यूरी सैन्य प्रशासन में सेना का संगठन, सैन्य अधिकारियों का कार्य-विभाजन, सीमा-सुरक्षा तथा महत्वपूर्ण मार्गों पर नियंत्रण जैसे विभिन्न पक्ष शामिल थे।

निष्कर्ष

कत्यूरी कालीन सैन्य प्रशासन एक संगठित सैन्य एवं सुरक्षा व्यवस्था का परिचायक था। सेना के चार अंगों तथा उनके लिए निर्धारित अधिकारियों से सैन्य संगठन में स्पष्ट कार्य-विभाजन दिखाई देता है। इसके अतिरिक्त महासामन्त जैसे उच्च अधिकारी तथा राजा का सर्वोच्च सैन्य नियंत्रण सैन्य व्यवस्था की केंद्रीय प्रकृति को दर्शाता है। राज्य की सीमाओं, पर्वतीय प्रवेश द्वारों, सीमांत मार्गों और नदी-घाटों की सुरक्षा के लिए अलग-अलग अधिकारियों की नियुक्ति कत्यूरी प्रशासन की विशेषता थी। विशेष रूप से उत्तराखंड की दुर्गम पर्वतीय भौगोलिक परिस्थितियों में इन व्यवस्थाओं का महत्व और बढ़ जाता था। इस प्रकार कत्यूरी सैन्य प्रशासन में सैन्य शक्ति के संगठन के साथ-साथ क्षेत्रीय नियंत्रण एवं सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया गया था।

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