माधो सिंह भंडारी

परिचय

माधो सिंह भंडारी पंवार/परमार वंश के राजा महिपति शाह के महान सेनानायक थे। उन्होंने अपनी सैन्य सेवाओं से महिपति शाह, रानी कर्णावती और पृथ्वीपति शाह के शासन को महत्वपूर्ण सहयोग दिया। उनके नेतृत्व में महिपति शाह द्वारा तिब्बत अभियान चलाया गया। माधो सिंह भंडारी केवल वीर योद्धा ही नहीं, बल्कि कुशल अभियंता और लोकहितकारी निर्माणकर्ता के रूप में भी प्रसिद्ध हैं। मलेथा की गूल उनके तकनीकी कौशल और दूरदर्शिता का प्रसिद्ध उदाहरण है।

माधो सिंह भंडारी प्रमुख तथ्य

  • माधो सिंह भंडारी का जन्म मलेथा, टिहरी गढ़वाल में हुआ था।
  • उनके पिता का नाम कालू/कालो भंडारी था। मानशाह ने उन्हें ‘सौनवाण’ या ‘स्वर्णिम विजेता’ की उपाधि दी थी।
  • माधो सिंह भंडारी की पत्नी का नाम उदीना बौराणी था।
  • माधो सिंह भंडारी को ‘गर्वभंजक’ कहा जाता है। इसका संबंध उस प्रसंग से है जिसमें उन्होंने अपने एकमात्र पुत्र गजेसिंह की बलि दी थी।
  • देवप्रयाग के रघुनाथ मंदिर के द्वार पर प्राप्त अभिलेख में माधो सिंह भंडारी के पुत्र गजेसिंह तथा पुत्रवधू मथुरा बौराणी का उल्लेख मिलता है।
  • 1640 ई. के रानी कर्णावती के ताम्रलेख में चमोली के एक हटवाल ब्राह्मण को भूमि दान दिए जाने का उल्लेख है। इसमें माधो सिंह भंडारी को साक्षी के रूप में उल्लिखित किया गया है।
  • उक्त ताम्रलेख के आधार पर चीन-तुमुल युद्ध के लगभग 1640 ई. के आसपास होने की संभावना व्यक्त की जाती है। इस छोटे चीन-तुमुल युद्ध में माधो सिंह भंडारी वीरगति को प्राप्त हुए।
  • माधो सिंह भंडारी की मृत्यु सतलुज नदी के तट पर हुई। वे पृथ्वीपति शाह के समय भी सेनानायक रहे थे।
  • माधो सिंह भंडारी ने मलेथा की प्रसिद्ध गूल का निर्माण कराया। इसका निर्माण छेणाधार पहाड़ी को काटकर किया गया था।
  • मलेथा की गूल लगभग 225 फीट लंबी बनाई गई, जिसके माध्यम से चन्द्रभागा नदी (चकमा नदी/डागर नदी) से पानी निकालकर मलेथा तक पहुँचाया गया।
  • मलेथा की गूल के निर्माण का श्रेय माधो सिंह भंडारी को दिया जाता है। यह उनकी अभियंत्रण-कुशलता और लोकहितकारी दृष्टिकोण का महत्वपूर्ण उदाहरण है।
  • मशेरगढ़ किले के निर्माण का श्रेय भी माधो सिंह भंडारी को दिया जाता है।
  • उनके सैन्य एवं निर्माण कार्यों के कारण माधो सिंह भंडारी को 16वीं सदी का पहला इंजीनियर भी कहा जाता है।
  • माधो सिंह भंडारी ने महिपति शाह के तिब्बत अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उनके नेतृत्व में तिब्बत विजय का उल्लेख मिलता है।
  • उन्होंने अपनी सेवाओं से महिपति शाह, रानी कर्णावती तथा पृथ्वीपति शाह—तीनों के शासनकाल में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

निष्कर्ष

माधो सिंह भंडारी गढ़वाल के इतिहास में वीरता, सैन्य नेतृत्व और अभियंत्रण-कौशल के अद्वितीय प्रतीक माने जाते हैं। उन्होंने महिपति शाह के समय तिब्बत अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तथा बाद में रानी कर्णावती और पृथ्वीपति शाह के शासन में भी सेनानायक के रूप में सेवाएँ दीं। दूसरी ओर, मलेथा की गूल जैसी जल-व्यवस्था का निर्माण उनके लोकहितकारी दृष्टिकोण और तकनीकी दक्षता को दर्शाता है। उनका जीवन गढ़वाल की सैन्य शक्ति, संघर्ष और जनकल्याणकारी निर्माण परंपरा का महत्वपूर्ण अध्याय है।

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