राजा उपेन्द्र शाह |Parmar/Panwar Dynasty|Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material
परिचय
राजा उपेन्द्र शाह को पंवार/परमार वंश का 50वाँ शासक माना जाता है। उनके शासनकाल के संबंध में विस्तृत ऐतिहासिक सामग्री उपलब्ध नहीं है और उनकी जानकारी मुख्यतः वंशावली तथा राज्य अभिलेखों से प्राप्त होती है। मौलाराम के अनुसार, फतेहशाह के बाद उपेन्द्र शाह गद्दी पर बैठे और उन्होंने लगभग एक वर्ष तक शासन किया। उनकी मृत्यु से संबंधित विवरण भी विशेष रूप से उल्लेखनीय है। टिहरी राज्य अभिलेखागार के अनुसार उनकी मृत्यु बग्वाल दीपावली के दिन हुई थी। उपेन्द्र शाह की कोई संतान नहीं थी, इसलिए उनकी मृत्यु के बाद उनके भाई दिलीप शाह के गद्दी पर बैठने का उल्लेख मिलता है। हालांकि, फतेहशाह के उत्तराधिकारी के संबंध में भक्तदर्शन और वाल्टन का मत अलग है।
प्रमुख बिंदु
- राजा उपेन्द्र शाह को पंवार/परमार वंश का 50वाँ शासक माना जाता है।
- मौलाराम के अनुसार, फतेहशाह की मृत्यु के बाद उनके उत्तराधिकारी के रूप में उपेन्द्र शाह गद्दी पर बैठे।
- उपेन्द्र शाह का शासनकाल बहुत अल्प रहा। उपलब्ध विवरणों के अनुसार उन्होंने लगभग एक वर्ष तक शासन किया।
- उपेन्द्र शाह की मृत्यु दीपावली के दिन हुई थी। उनकी मृत्यु का यह विवरण उनके अल्प शासनकाल से संबंधित प्रमुख तथ्य है।
- टिहरी राज्य अभिलेखागार के अनुसार उपेन्द्र शाह की मृत्यु बग्वाल दीपावली के दिन हुई थी।
- उपेन्द्र शाह की कोई संतान नहीं थी। उनकी मृत्यु के बाद उनके भाई दिलीप शाह के पंवार राज्य की गद्दी पर बैठने का उल्लेख मिलता है।
- उपेन्द्र शाह के उत्तराधिकार के संबंध में स्रोतों में मतभेद मिलता है। भक्तदर्शन और वाल्टन फतेहशाह का उत्तराधिकारी सीधे दिलीप शाह को मानते हैं, जबकि मौलाराम के अनुसार फतेहशाह के बाद उपेन्द्र शाह राजा बने थे।
- इसलिए उपेन्द्र शाह के शासन तथा उत्तराधिकार से संबंधित तथ्यों को प्रस्तुत करते समय मौलाराम की वंशावली और अन्य स्रोतों के बीच मतभेद को ध्यान में रखना आवश्यक है।
निष्कर्ष
राजा उपेन्द्र शाह का शासनकाल पंवार वंश के इतिहास में अत्यंत अल्प अवधि का रहा। मौलाराम के अनुसार वे फतेहशाह के उत्तराधिकारी तथा परमार वंश के 50वें राजा थे और उन्होंने लगभग एक वर्ष शासन किया। उनकी मृत्यु बग्वाल दीपावली के दिन होने का उल्लेख टिहरी राज्य अभिलेखागार से मिलता है। संतान न होने के कारण उनके बाद उनके भाई दिलीप शाह के गद्दी पर बैठने की परंपरा मिलती है। हालांकि, भक्तदर्शन और वाल्टन फतेहशाह के बाद सीधे दिलीप शाह को उत्तराधिकारी मानते हैं, इसलिए इस विषय में स्पष्ट ऐतिहासिक साक्ष्य के अभाव और स्रोतों के मतभेद को परीक्षा-उपयोगी नोट्स में अवश्य याद रखना चाहिए।